विगत 15 से अधिक घंटो की मुसलाधार बारिश से बिजली व्यवस्था चरामरा गयी।किसी भी फीडर की लाइनें दुरूस्त नही है। जरूरी उपकरण मोबाइल फोन को चार्ज नही कर पाने के कारण बंद हो गये। अतिआवश्यक कार्यो के लिए बना सम्पर्क सूत्र निर्जीव हो हो बिज़ली उपभोक्ताओं को मुंह चिढा रहा है।

सरकार ने विगत वर्षों से गाँव मे मिलने वाले मिट्टी के तेलों पर भी विराम लगा दिया। जिससे बिजली नही होने के कारण गाँव घरों के निवासी अन्धेरे मे रहने को विवश है।मुसलाधार बारिश मे जहरीले जीव जन्तु घबराकर घरों मे पलायन करने का खतरा भी बना हुआ है। अधिकारी कर्मचारी बिजली व्यवस्था का सुधार कबतक होगा यह भी बता पाने की स्थिति मे नही नजर नही आ रहे।

स्कूल खुलते ही बच्चों की शिक्षा का बोझ बढा लेकिन अंधेरे मे पढाई कैसे करे एक चिंता का विषय अभिभावकों को सता रहा है। बिजली अधिकारी इन सभी परेशानियों से अपने आप को अलग कर व्यवस्था मे गडबडी का कारण बताकर शासन व्यवस्था की जिम्मेदार मानते है।

जब किशान ने सरकारी तेल वितरण बंद करते हुए शाम सात बजे से पांच बजे तथा चार घंटे दिन मे बिजली देने का दावा किया था। बावजूद इसके महज तीन दिन की बरसात ने प्रदेश सरकार के दावों की पोल खोल दी।हर स्तर पर विद्युत व्यवस्था जीर्ण-शीर्ण होने से क्षेत्रीय ग्रामीण दुकानदार प्रभावित हो सरकार के किये गये दावों पर कोस रहा है।
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