मुरादाबाद के महिला अस्पताल में आयुष डॉक्टर के पद पर कार्यरत डॉ अनिता मौर्य रविवार को बाथरूम में लगे गीजर की गैस के कारण बेहोश हो गई थी। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज हृदय रोग विशेषज्ञ की निगरानी में किया गया। रात में चार घण्टे भर्ती होने के बाद अनिता मौर्य की हालत में सुधार आया। डॉ वीके खरे ने बताया कि, “अगर मरीज थोड़ी देर और बाथरूम में बंद रहती तो, उनकी जान जा सकती थी।”
खतरनाक हो सकता है गैस गीजर
गैस गीजर के बर्नर्स से पैदा होने वाली आग के कारण ऑक्सीजन की खपत अधिक होती है और कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। कार्बन मोनोआक्साइड भी बनती है। यह रंगहीन व गंदहीन गैस होने के साथ-साथ बेहद जहरीली होती है। यही गैस मौत का कारण बन जाती है। बिना वेंटिलेशन वाले बाथरूम में गैस गीजर से निकलने वाली गैस के कारण खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इससे शरीर के लगभग सभी अंग प्रभावित होने लगते हैं। दिल तथा दिमाग को जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन न मिलने के कारण व्यक्ति बेहोशी में चला जाता है और उसकी मौत हो सकती है।
कैसे बरतें सावधानी
गीजर से जुड़ा गैस सिलेंडर कहीं भी हो, लेकिन उसका बर्नर बाहर होना चाहिए, जिससे बाथरुम के अंदर ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी और बेहोश होने जैसी समस्या नहीं आएगी। यदि बर्नर बाथरूम से बाहर लगाने की व्यवस्था न हो तो लोगों को चाहिए कि, वह बाल्टी में पहले पानी भर लें और इस समय बाथरूम खुला होना चाहिए। गीजर को बंद करने के बाद ही नहाना शुरू करें। ऐसा करने से कार्बन मोनो आक्साइड नहीं बनेगी। यदि गीजर चल रहा है और नहा रहे हैं तो गैस बनेगी और बेहोशी से नहीं बचा जा सकता। जागरूकता व बर्नर बाथरूम से बाहर लगाने से ही इस समस्या से निजात मिल सकती है।
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