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अग्निशमन विभाग की मिलीभगत से क्षेत्र मे आग के खतरे से भयानक हादसे का कारोबार फलफूल रहा है । विभागीय परमिट मे खेलकर लोगों की दूकान और अस्पताल मे दिखावटी के लिए सिलेंडर रखवाकर खानापूर्ति की गई ।बिना एनओसी के चल रहीं है संस्थाए ।इलाके मे विद्यालय ,नर्सिंग होम ,अवैद्व गैस रिफलिंग,तथा पटाखे का कारोबार सभी प्रमुख बाजारों और कस्बों मे वर्षों से बिना अग्निशमन के एन ओ सी के फलफूल रहा है ।जबकि विभाग की जिम्मेदारी होती है कि जहाँ भी विष्फोटक साम्रग्री का कारोबार हो रहा है उसकी चौहद्दी की जाँचकरे और यदि सुरक्षा की शर्ते पूरी करता हो तो एन ओ सी की फीस जमा कराकर प्रमाण पत्र जारी करे ।
लेकिन पश्चिम शरीरा अग्निशमन विभाग मे नियुक्त जिम्मेदार अधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है ।यदि सूत्रो की माने तो विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपनी मर्जी से बिना एन ओ सी के आग बुझाने के लिए दो सिलेंडर देकर चुपचाप सुविधा शुल्क की वसूली करते है ।पूरब शरीरा ,पश्चिम शरीरा ,मे संचालित किसी नर्सिंग होम मे यदि आगजनी की घटना हो जाय तो किसी के पास कोई सुविधा नही है और नहीं अग्निशमन का एनओसी है । इसी प्रकार पश्चिम शरीरा मे माचिस की गोदाम है यदि इसमे आग की एक चिंगारी उठ जाए तो पूरे मुहल्ले को साफ करने के लिए पर्याप्त है ।ऐसे कारोबारियों को एनओसी लेने का लाखों रुपये का खर्च बता दिया जाता है । इस लिए शार्टकट रास्ते से चलकर काम करने की सलाह दे दी जाती है और फिर शुरू होता है हर महीने सुविधा शुल्क वसूली का सिलसिला ।
इसी प्रकार क्षेत्र के सभी बाजारों मे छोटे गैस सिलेंडरों की रिफलिंग की जाती है ।जिससे कभी भी बडा हादसा हो सकता है ।दीवाली मे पटाखा बेचने के लिए के लिए लाखों का पटाखा डम्प है । इन सभी को फायर विभाग की गुप्त अनुमति प्रमाण पत्र जारी है ।यदि जिले के आला अधिकारियों द्वारा अग्निशमन विभाग के खेल की गोपनीय जाँच कराई जाय तो इनके अवैद्व वसूली का पर्दाफाश हो सकता है ।
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