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पडरौना,कुशीनगर। कुशीनगर के पडरौना क्षेत्र का एक गांव है बनवारी टोला। इस गांव की दो बहनें हैं ज्योति और नेहा। ज्योति 18 साल की हैं और नेहा 16 की। ये दोनों बहनें दूसरी लड़कियों से काफी अलग हैं। दोनों अपने गांव में मर्दों का सैलून चलाती हैं।आदमियों की दाढ़ी बनाती हैं, बाल काटती हैं। ज्योति ने सैलून चलाने के लिए खुद को बिल्कुल लड़कों के जैसा बना लिया है। आइए जानते हैं इनकी पूरी कहानी…………………
– नेहा और ज्योति के पिता का नाम ध्रुव नारायण है। उनकी छह बेटियां हैं। वो गांव में दाढ़ी-बाल बनाने की छोटी सी गुमटी लगाया करते थे। इससे होने वाली
कमाई से उन्होंने अपनी चार बेटियों की शादी करा चुके थे। पांच साल पहले तक सब ठीक था। लेकिन फिर साल 2014 में सब बदल गया।
माता पिता को बेटियों पर है गर्व ध्रुव नारायण को लकवा मार गया, तब ज्योति 13 और नेहा 11 साल की थीं।
पिता को लकवा मारा, तो गुमठी बंद हो गई। खाने के लाले पड़ने लगे, पर ज्योति ने हिम्मत नहीं हारी। परिवार का सहारा बनने की ठानी और बंद पड़ी दुकान खोली। 5 साल मेंछोटी दुकान बन गई सैलून – ज्योति बताती हैं कि उन्होंने काम सीखने में बहुत मेहनत की। पांच साल में छोटी सी दुकान को सैलून बना दिया। छोटी बहन नेहा ने भी, ज्योति का साथ दिया, आज दोनों बहनें, सैलून चला रही हैं।
ज्योति ने बताया ये काम इसलिए भी मुश्किल था क्योंकि पिता की बीमारी का इलाज चल रहा था। गांव में दाढ़ी बनाने का काम आदमी ही करते थे, दादा-पापा ने ये काम किया था। लेकिन कभी किसी लड़की ने ये काम नहीं किया था। ज्योति ने इस काम के लिए नया आइडिया अपनाया। उन्होंने अपना पूरा गेटअप चेंज किया। ब्वॉयकट कराया, लड़कों जैसे कपड़े पहने और वैसा ही बर्ताव किया। यहां तक की अपना नाम बदलकर दीपक रख लिया। धीरे-धीरे लोग दुकान पर आने लगे।
रोज कमाती हैं 400 रुपए तक
दोनों बहनें रोजाना 400 रुपए कमा लेती हैं। लेकिन वो हमेशा ये काम नहीं करना चाहतीं, बल्कि ब्यूटी पार्लर खोलना चाहती हैं। फिलहाल, उनके पिता की तबीयत पहले से बेहतर है। अब वो भी कई बार दुकान आतेहैं, बाहर बैठते हैं।
-ज्योति की मां का नाम है लीलावती। वे कहती हैं कि उन्हें अपनी बेटियों पर गर्व है। दोनों की हिम्मत की वजह से ही उनका परिवार संभला है। घर इनकी मेहनत से ही चल रहा है।- ध्रुव नारायण कहते हैं कि उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि समाज क्या कहता है। उनकी बेटियां ईमानदारी से काम कर रही हैं। आगे भी करेंगी।
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