उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना, कुशीनगर : महात्मा गांधी रोजगार गारण्टी एक्ट के तहत 15 दिन के भीतर मजदूरी भुगतान करना है, देरी होने पर जिम्मेदारी फिक्स कर कार्रवाई करने की बात कही गई है। मगर कुशीनगर जिले में 23 हजार मजदूरों को 25 दिनों से मजदूरी नहीं मिली है। मजदूरों का प्रशासन पर 2.35 करोड़ मजदूरी बकाया हो गया है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? मजदूर अपनी मजदूरी पाने के लिए गांव से लेकर ब्लाक के जिम्मेदारों के यहां चक्कर लगा रहे हैं।
मनरेगा एक्ट के तहत मजदूरों के हाथ में एक साल में सौ दिन रोजगार देना है। इसके साथ ही मजदूरी की रकम का भुगतान 15 दिन के भीतर करना है। काम नहीं देने पर मजदूरी का भत्ता तथा समय से मजदूरी नहीं देने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करते हुए रिकवरी करने का एक्ट में प्राविधान है। मगर कुशीनगर जिले के 23 हजार मजदूरों को 25 दिनों से मजदूरी नहीं मिली है। यानी निर्धारित अवधि 15 दिन से 10 दिन अधिक हो गए अभी तक इनके खातों में रकम नहीं पहुंची है।
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मजदूर मजदूरी मिलने की आस में किराना की दुकानों से उधार लेकर काम चला रहे हैं। दुकानदार अब चेतावनी देना शुरू कर दिए हैं कि दो दिन के अंदर भुगतान नहीं मिला तो सामान देना बंद कर देंगे, ऐसे में मजदूरों के सामने परेशानी आ खड़ी हुई है। वहीं इन मजदूरों को राहत देने वाले जिम्मेदार कह रहे हैं कि हम लोग अपना काम कर दिए हैं। ऐसे में मजदूर किस दर पर जाएं कि इनको मजदूरी मिलने का कोई भरोसा दिला दे।
मनरेगा मजदूरों का करीब 2.35 करोड़ रुपए बकाया है। भुगतान की प्रक्रिया कर दी गई है। मनरेगा मेन एकाउंट से धनराशि सीधे मजदूरों के खातों में आनी है। शीघ्र मजदूरी दिलाने की दिशा में उच्चाधिकारियों के संज्ञान में ला दिया गया है। मनरेगा का पूरा विवरण ऑनलाइन है, उम्मीद है कि जल्द ही मजदूरी भुगतान हो जाएगा।
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