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उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर। लोक आस्था का महापर्व छठ बुधवार को भगवान उगते हुए सूर्य को अघर्य देने के साथ ही संपन्न हो गया। इस महापर्व के आखिरी दिन भगवान उदीयमान के अध्य के बाद व्रतीय माताओ ने अन्न जल ग्रहण कर व्रत का ” पाराणय” किया। भगवान भास्कर व षष्ठी मइया के पर्व छठ को लेकर चार दिनो तक पूरा कुशीनगर जनपद भक्तिमय रहा पडरौना शहर से लेकर कस्बा,गांव,जवार से लगायत नदी,तालाब व पोखरे छठ पूजा की पारंपरिक गीत से गूजते रहे।
यूपी और बिहार मे मनाये जाने वाला छठ महापर्व अब पूरे देश मे आस्था व विश्वास के साथ मनाया जाता है। सोमवार को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ भगवान तपन का यह महापर्व बुधवार को उगते हुए भगवान रवि को अध्य के बाद कुल चार चरणो मे संपन्न हुई। नहाय-खाय से लेकर डूबते व उगते हुए भगवान लोकप्रकाशक को अध्य देने के पश्चात पूर्णाहुति वाले इस महापर्व की तमाम धार्मिक मान्यता और एतिहासिक महत्व है। भगवान मर्तड ( सूर्य)की पूजा की परम्परा है शास्त्रों के अनुसार शुक्ल पक्ष मे षष्ठी तिथि को इस पूजा का विशेष महत्व है।
कोसी भरने की परंपरा है खास
कोसी भरने वाली व्रती माताए मंगलवार की रात्रि के दुसरे पहर से ही घाटों पर पहुंचने लगे थे। कोसी भरने की महान परंपरा संपन्न कराने के लिए लोग जल्दी छठ घाटों पर पहुंच रहे थे मान्यता है कि ऐसे व्रती जिनके घर में उस साल खुशियां या प्रगति होती है वह कोसी भरते हैं। कुछ लोगों ने अपने घर के बाहर में कुंड बनाकर छठ पूजा किया। बुधवार को प्रातं: काल के तीसरे पहर से ही नदी -तालाब और पोखरो के तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई थी।
भगवान सूर्य और माता षष्ठी को समर्पित छठ पर्व
सूर्य षष्ठी (छठ) पूजा 13 अक्टूबर से प्रारंभ हुई और 14 अक्टूबर को इस व्रत की पूर्णाहुति की गई। पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन अस्त होते त्रिलोकेश(सूर्य )को अर्घ्य तो चौथे दिन उगते हुए भगवान लोक साक्षी ( सूर्य ) को अर्घ्य दिया गया। मान्यता है कि संतान की रक्षा एवं पुत्र प्राप्ति के साथ -साथ परिवार मे खुशहाली के लिए छठ पूजा की जाती है। इसमें 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर पूजन किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित आशूतोष मिश्रा के अनुसार सूर्य षष्ठी (छठ पूजा) व्रत भगवान गृहेश्वर (सूर्य देव) और उनकी बहन माता षष्ठी देवी को समर्पित है। इस व्रत के माध्यम से इनकी उपासना कर हर मनोकामना पूर्ण की जा सकती है।
छठी मईया पूरी करती हैं पुत्र प्राप्ति की कामना
छठ महापर्व को मन्नतों और मुरादों का पर्व कहा गया है। छठ पर्व में मान्यता है कि इस पर्व में गलती की कोई जगह नहीं है। इसलिए इस पर्व में शुद्धता का बेहद खास खयाल रखा जाता है। छठ में डूबते और उगते दोनों समय भगवान तापन (सूर्य )को अर्घ्य दिया जाता है। भगवान कर्ता-धर्ता(सूर्य ) की आराधना का इतिहास बहुत ही पुराना है।
छठ पूजा 2018: महत्वपूर्ण पूजन सामग्री. छठ पर्व की मान्यता के विषय में पुराणों में ऐसी कई कथाएं हैं जिसमें मां षष्ठी के साथ-साथ सूर्यदेव की पूजा की बात कही गई है। फिर चाहे वो त्रेतायुग में भगवान राम हों या फिर सूर्य के समान पुत्र कर्ण की माता कुंती। छठ पूजा को लेकर परंपरा में कई …
छठ मैया के व्रत से होती है हर मनोकामना
वेद-पुराणो के मुताविक छठ पर्व पर भगवान सूर्य देव के साथ उनकी बहन छठी माता की पूजा की जाती हैं और छठी माता बच्चों की रक्षा करती हैं। इस व्रत को विधि-विधान पूर्वक करने से संतान प्राप्ति के साथ साथ हर मनोकामनाए पूरी होती है। छठ पूजा के दिन भगवान भास्कर की विधि-विधान से पूजा की जाती है ।सूर्य देव जिनकी कृपा से ही इस पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया है और जो हमें आरोग्य प्रदान करते हैं। ये त्यौहार यूपी, बिहार, झारखंड सहित पड़ोसी देश नेपाल में भी बडी आस्था और धुमधाम से मनायी जाती है।
आकर्षक व मनमोहक सजे थे पडरौना शहर व गांव के छठ घाट
छठ पर्व को लेकर स्थानीय व समाजसेवी लोगो द्वारा घाटो को दुल्हन की तरह आकर्षक व मनमोहक तरीके से सजाया गया था जो घाट पर मौजूद हर किसी को अपनी आकर्षित कर रहा था। इसमे नगर के रामकोला रोड चित्रगुप्त मंदिर के सामने स्थित पोखरा, बेलवा जंगल धोबी घाट, बावली पोखरा, रामधाम पोखरा, छावनी पोखरा, कसया के राम जानकी पोखरा, शिव मंदिर पोखरा, सेवरही के शिवाघाट, रामकोला चीनी मिल पोखरा आदि प्रमुख है इसके अलावा जनपद के सभी छठ घाटो को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। चारो ओर जगमगाती प्रकाश अपने आप मे मनभावन दिख रहा था।
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