कुशीनगर में विशुनपुरा थाने के पुलिस द्वारा लड़की को भगाने के मामले में आरोपी लड़के के बाप से 20 दिन तक बेगारी कराने का फोटो वायरल होने पर एसआई लाइन हाजीर

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रिपोर्ट उपेंद्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर : देश को आजाद हुए भले ही सात दशक से ऊपर हो गया लेकिन सामंतवादी सोच,गुलामी और बेगार प्रथा के मानसिकता वाले लोग गरीबो और असहायों को कानून के नाम पर डराकर उन्हें किस कदर प्रताड़ित किया गया है,इसका जीता जागता उदाहरण तमकुहीराज सर्किल के विशुनपुरा थाने में देखने को मिल रहा था।
इस सिलसिले में थाने के एक उपनिरिक्षक द्वारा लड़की भगाये जाने के मामले में आरोपी लड़के के बाप को थाने के अंदर अपने कमरे पर 20 दिनों से जबरिया निरुद्ध कर न सिर्फ बेगारी कराए बल्कि उसे तरह तरह की मानसिक प्रताड़ना भी दिया गया । कप्तान की सख्त कार्यशैली से बेपरवाह उक्त उपनिरिक्षक का यह शर्मनाक कारनामा सीधे तौर पर मानवता के प्रति अपराध और खाकी के चेहरे को दागदार करने वाला कृत्य था,ऐसे में जिले के एसपी बिनोद कुमार मिश्रा ने मामले की जानकारी होते ही बिशनपुरा थाने में तैनात अरुन कुमार चौबे को लाइन हाजिर कर दिया ।
गौरतलब हो कि विशुनपुरा थाना क्षेत्र के जंगल लुअठहा निवासी धर्मेंद्र खटीक पुत्र बच्चा खटीक लगभग 20 दिन पहले गॉव से ही किसीं लड़की को बहला फुसलाकर भगा ले गया था। उक्त मामले की शिकायत मिलने के बाद विशुनपुरा थाने पर लगभग कई बर्षो से तैनात चर्चित उपनिरीक्षक अरुण कुमार चौबे द्वारा बच्चा खटीक को उसी दिन पकड़कर थाने लाया गया,और तब से लेकर आज तक वह उस गरीब को थाने के अंदर अपने कमरे पर जबरिया निरुद्ध रखकर उसे तरह तरह मानसिक प्रताड़ना देते हुए उससे पैर दबवाने,सब्जी कटवाने,कपड़ा धुलवाने से लेकर झाड़ू पोंछा कराने की बेगारी करा रहे थे । हालाकी पुलिस द्वारा 20 दिनों से थाने में जबरिया रोककर बेगारी कराए जाने और मानसिक रूप से प्रताणित हो रहे गरीब और असहाय बच्चा से उनकी आपबीती पूछे जाने पर जार जार होकर उनका रोना बच्चा खटीक पर पुलिसिया जुल्म की भयावह कहानी बताने के लिए काफी है।

20 दिनों से अधिक समय से एक गरीब को थाने के अंदर निरुद्ध रखकर उससे बेगारी और मजदूरी कराया जाने का यह मामला हैबियस कार्पस का बनता है, जबकि जिसको खाने के लिए दो जून की रोटी नही नसीब है,वह माननीय उच्च न्यायालय में हैबियस कार्पस कहा से दाखिल कर पायेगा। बच्चा की माने तो इस घटनाक्रम के बाद जब वह पकड़कर थाने चला आया तो उसकी विक्षिप्त पत्नी घर छोड़कर कही चली गयी,और घर पर एक मात्र सदस्य के रूप में उसका 12 बर्ष का एक नाबालिग लड़का मौजूद है,जिसको समय से भोजन भी नही नसीब हो पा रहा था‌। आरोपी लड़के पर दबाव डालने के निमित्त उसके पिता को गिरफ्त में लेकर पुलिस ने जो कार्यवाही प्रारम्भ किया वह स्वाभाविक है, लेकिन उसके आड़ में 20 दिनों तक गरीब को कानून का भय दिखाकर उसका शोषण करना तथा पैर दबवाने से लेकर झाड़ू पोछा करवाना अत्यंत ही शर्मनाक है और यह शर्मनाक कारनामा धड़ल्ले के साथ विशुनपुरा थाने में किया गया था है।

नवागत पुलिस कप्तान की सख्त कार्यशैली से बेपरवाह होकर उपनिरिक्षक द्वारा थाने के अंदर जिस तरह से एक गरीब पर जुल्म किया गया था,वह सीधे तौर पर अंधेरगर्दी के सिवाय कुछ भी नही और यह मामला सार्वजनिक होते है निशिचित रूप से कप्तान ने उप निरीक्षक पर कार्यवाही करते हुए लाइन हाजीर कर दिया है।

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