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उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर । इन्सानियत व मानवता को दरकिनार कर हमेशा चर्चा में रहने वाले पडरौना के रामकोला रोड तिलक नगर मुहल्ले में स्थित किलकारी हॉस्पिटल के चिकित्सक अपनी दबंगई व कारगुजारी को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में आया है | इसी अस्पताल में भर्ती 7 वर्षीय मासूम के परिजनों द्वारा अस्पताल के दवा काउंटर पर तैनात स्टाफ को महज 64 रुपया नहीं चुकाने के वजह से मासूम की हुई मौत के बाद आरोपी चिकित्सक के खिलाफ मृतक के परिजनों द्वारा विरोध करने व कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर कारवाई करने के मामले में आरोपी चिकित्सक द्वारा कोतवाली पुलिस को मोटी रकम देकर कर मामले को फिर मैनेज कर दिया गया है ।
बेशक : बताते चलें कि बलिया जिला के रसड़ा थाना निवासी अनीता देवी पत्नी पिंटू विश्वकर्मा गत दिनों पूर्व पडरौना नगर के लाजपत नगर निवासी श्रीकांत विश्वकर्मा के यहां अपने मायके आई हुई थी। बीते 10 सितंबर को उसके पुत्र रितिक उम्र 7 माह की तबीयत अचानक खराब होने पर उक्त चिकित्सालय में इलाज कराने के लिए परिजन लेकर पहुंचे थे,डॉक्टर ने जांचोपरान्त उसकी हालत गंभीर बताते हुए भर्ती कर भी कर लिया था, इतना ही नहीं इलाज भी शुरू कर दिया था कि, इलाज से उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। परिजनों ने स्थिति में सुधार नहीं होने पर दूसरे जगह ले जाने की बात डॉक्टर से कहीं थी,लेकिन डॉक्टर ने अपने ही अस्पताल में ठीक हो जाने का भरोसा वी मरीज को रखे रहा।
मृतक मासूम की मां की माने तो गत दिन बुधवार की सुबह लगभग 6:00 बजे मासूम की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ने लगी इसकी सूचना उस मा ने सर्वप्रथम डॉक्टर को दी, लेकिन डॉक्टर अस्पताल में देर से पहुंच कर जांच कर दवाइयां लिख दी थी |
हालांकि मासूम के मा ने जब दवा लेने काउंटर पर पहुंचने पर कंपाउंडर ने दवा तो दे दिया लेकिन उस दवा की कीमत ₹ 64 मांगा तो परिजन थोड़ी देर में पैसा दे देने की बात कहने लगे लेकिन कंपाउंडर ने डांट फटकार लगा कर भगा दिया और दवा उसके हाथ से छीन ली। उधर दो-तीन घंटे गुजर गए और मासूम की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी | बताया जाता है मासूम की हालत बिगड़ते देख डॉक्टर ने उसे आईसीयू में भर्ती तो कर दिया कि अगले सुबह दिन के लगभग 9:00 बजे अस्पताल में मौत हो गई।
क्या होगा डीएम,सीएमओ का अगला कदम ?
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मासूम के मां के द्वारा तहरीर देने के बाद कोतवाल के आदेश के बावजूद आरोपी चिकित्सक के विरूद्व कोई कार्रबाई न होना अपने आप में एक सवाल है। सवाल यह भी है कि मामले की जांच कर रही पुलिस इस मामले को ठण्डे बस्ते में डालने के पीछे मंशा क्या थी ? हलाकि चर्चा जोरो पर है कि पुलिस ने आरोपी चिकत्सक से मोटी रकम वसूल कर मामले को लीपापोती कर अपने स्तर से रफ-दफा कर दिया है। अगर इस बात में तनिक भी सच्चाई है तो जिलाधिकारी व सीएमओ का अगला कदम क्या होगा ?
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