कुशीनगर में पहलवानों के गुरु के नहीं रहने पर अब पहलवानी की कला को आगे बढ़ाने में जिम्मेदारी निभाएंगे इनके नाती शिवम उपाध्याय

कुशीनगर में पहलवानों के गुरु के नहीं रहने पर अब पहलवानी की कला को आगे बढ़ाने में जिम्मेदारी निभाएंगे इनके नाती शिवम उपाध्याय
उपेंद्र कुशवाहा
पडरौना कुशीनगर : भारतीय कुश्ती व पहलवानों के गुरु स्वर्गीय पंडित दया शंकर उपाध्याय भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी यादें हमेशा पडरौना से जुड़ी रहेगी। उनकी समय की वह कुश्ती लोगों के जेहन से भुलाए नहीं जा सकता।
पडरौना नगर निवासी में पं. स्वर्गीय दयाशंकर उपाध्याय 86 वर्षीय का निधन इसी मांह भीतर हुआ है।
बताते चलें कि पडरौना शहर में सबसे पहला जिम आर्य समाज व्यायामशाला के नाम वर्ष 1998 में खोला गया था। जिम के संचालक पंडित दयाशंकर उपाध्याय ने कुश्ती कला के लिए एक तरफ पहलवानों को तैयार किया तो,दूसरी ओर शहर के युवाओं को शरीर फिट रखने का गुर सिखाया। 20 साल पुराने इस जिम में आज भी सैकड़ों की संख्या में युवक,युवतियां और किशोर सुबह और शाम के वक़्त पहुंचते हैं। इस जिम से निकले दर्जन भर युवा भारतीय सेना में शामिल होकर देश की रक्षा कर रहे हैं। नेशनल लेवल के कोच की संरक्षण में जिम आये लोगों को शरीर फिट रखने का प्रशिक्षण दिया जाता है। शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए भरपूर डाइट देने का ख्याल रखा जाता है।

इतना ही गरीब युवकों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी भी जिम संचालक की होती है। जबकि व्यायामशाला का उद्देश्य है कि युवाओं को स्वस्थ एवं चरित्रवान बनाया जाए। इसी साल पंडित दयाशंकर उपाध्याय का निधन हुआ है। अब पहलवान के गुरु कहे जाने वाले स्वर्गीय पंडित दया शंकर उपाध्याय के न रहने पर इनके पौत्र शिवम उपाध्याय के देखरेख में जिम का संचालन हो रहा है। ऐसे में कुश्ती संघ के सदस्य शिवम उपाध्याय अपने एलबम दिखाते हुए वे स्वर्गीय दादा पंडित दयाशंकर उपाध्याय की स्मृतियों को ताजा करते हैं। बकौल आर्य समाज व्यामशाला पडरौना उपाध्याय जिम से जुड़े सदस्य श्री उपाध्याय बताते हैं कि उन्होंने अपने दादा की कुश्ती व पहलवानी की कला को आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदारी स्वयं निभाएंगे। बहरहाल यह तो एक बानगी है। पडरौना में हुई मास्टर चंदगिराम की कुश्ती के चश्मदीद लोग भी दारा सिंह की कला के साथ साथ कुशीनगर जिले के पडरौना शहर में पहलवानों के गुरु कहे जाने वाले स्वर्गीय पंडित दयाशंकर उपाध्याय व दारा सिंह के बीच लगा व कि कहानी कभी नहीं भूल पाएंगे।

कुश्ती के पुरोधा रहे दारा सिंह से भी दयाशंकर उपाध्याय से बेहद अच्छे थे लगाव
भारतीय कुश्ती के पुरोधा रहे दारा सिंह से भी 86 वर्षीय दयाशंकर उपाध्याय के अच्छे रिश्ते थे। जबकि यह दोनों शख्स अब लोगों के बीच नहीं हैं । कुशीनगर कुश्ती संघ के सदस्य शिवम उपाध्याय बताते हैं कि उनके पिता पप्पु उपाध्याय के अनुसार 29 जनवरी-79 को पडरौना में आयोजित दंगल में दारा सिंह व टाइगर आजाद पाकिस्तानी के बीच कुश्ती हुई थी। कहते हैं कि वर्ष 85,90 व 93 के दंगलों में दारा सिंह मुख्य अतिथि बनकर यहां आए थे। पडरौना से उनका बेहद लगाव था। वह कहते हैं कि उनके दादा स्वर्गीय पंडित दया शंकर उपाध्याय के जीवित रहने पर इनके घर पर कई बार रात्रि प्रवास किया था। एलबम दिखाते हुए वे दारा सिंह की स्मृतियों को ताजा करते हैं। कहते हैं कि वर्ष 90 में दर्शकों के डिमांड पर दादा स्वर्गीय पंडित दयाशंकर उपाध्याय ने कुश्ती के पुरोधा रहे दारा सिंह को बुलाया था जिसमें दारा सिंह ने रामायण के प्रसिद्ध डायलाग जयश्री राम को बोलकर लोगों का मन मोह लिया था।

इतना ही नहीं 29 जनवरी 1989 में पंडित दयाशंकर उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय पहलवान दारा सिंह और पाकिस्तानी पहलवान टाइगर आजाद की कुश्ती कराई थी। इसके बाद 1990 में मास्टर चन्दगीराम ने यहां अपने कला कौशल का प्रदर्शन किया। पंडित उपाध्याय भारत के पहलवानों के गुरु कहे जाते हैं। भारत के अलावा पंडित उपाध्याय ने सिंगापुर,बैंकाक,थाईलैंड,मलाया,

सिंगापुर समेत कई देशों में अखाड़ा बनाकर भारत की प्राचीन कुश्ती कला को विदेशी सरजमीं पर उतारा है। आज भी इन देशों में कुश्ती का आयोजन होता रहता है।

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