उपेंद्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर : लाक डाउन के बीच प्रतिबंध के बावजूद प्लास्टिक पाउच वाले गुटखे की बिक्री बदस्तूर जारी है। प्रतिबंध के बाद इसकी जमाखोरी और कालाबाजारी काफी बढ़ गयी है। प्रतिबंध का भय दिखाकर चोरी-छिपे उसे उपलब्ध कराये जाने के बहाने गुटखे के थोक व्यवसायी फुटकर दुकानदारों से अधिक दाम वसूल रहे हैं। जिससे खुले बाजार में पूर्व की तुलना में गुटखे की विभिन्न किस्में दो गुने से तीन गुने दामों में उपभोक्ताओं तक पहुंच रही है।
पडरौना नगर के लाकडाउन के बीच बंद गुटखे की बिक्री पर प्रतिबंध लगने के बाद से तो यह बाजार से पूर्णतया गायब हो जाना चाहिए था,लेकिन ऐसा नहीं हो पाया,उल्टे इसका लाभ उठाकर इसके थोक व्यवसायी इस प्रतिबंध की आड़ में अधिक मुनाफा कमाने लगे। विभिन्न गुटखे,पान मसाले व तंबाकू उत्पाद का सेवन करने के आदि हो चुके लोगों की आदतों को तो अनायास बदला नहीं जा सकता। तंबाकू उत्पाद की लत की विवशता का लाभ व्यवसायियों द्वारा इसे चोरी-छिपे उपलब्ध कराकर अधिक कीमत वसूला जा रहा है। इसके सेवन के आदि हो चुके कुछ ग्राहकों ने बताया कि शहर से ग्रामीण अंचलों तक इसकी कमी बताकर प्रतिबंध के नाम पर अधिक कीमत वसूला जा रहा है।
इन दिनों लाक डाउन लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी मांग अन्य दिनों की तुलना में अधिक हो गयी है। कोरेना महामारी से निपटने के लिए लाकडाउन सिलसिला बढ़ाने के लिए बंद तंबाकू उत्पादों,पान-चाय के आफर से होती है। ग्रामीण क्षेत्र के एक फुटकर विक्रेता ने बताया कि रजनीगंधा का नियत दाम छह रुपये है जो अब चोरी-छिपे ग्राहकों को 30 रुपये तक बेचा जाता है। कमला पंसद की नियत कीमत पांच रुपये है जो पंद्रह रुपये तक में उपलब्ध कराया जाता है। जबकि अन्य अन्य प्रकार के आने वाले गुटके के दामों में भी दो गुने भाव में उपभोक्ताओं को बेची जा रही है।
इस तरह जिले के पडरौना शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बंद तंबाकू, पुड़िया उत्पाद की बिक्री प्रतिबंध आयात होने के बाद भी चोरी-छिपे जारी है। इसके थोक विक्रेताओं द्वारा इसकी जमाखोरी,कालाबाजारी के माध्यम से चांदी काटी जा रही है। हालांकि पडरौना शहर के ही व्यापार मंडल से जुड़े जिले के जिला अध्यक्ष ऐसे व्यापार संगठन से जुड़े व्यापारियों के जमाखोरी पर लगाम लगाने के बजाय बोलने से भी चुप्पी साधे बैठे हैं ।
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