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रिपोर्ट उपेंद्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर : दुर्गा विसर्जन और अन्य धार्मिक आयोजनों से खिरकिया नदी की सेहत ऐसी बिगड़ी है कि हिन्दुओं के आस्था ने इस पवित्र नदी को नरक बना दिया है। खासकर प्रतिमा विसर्जन के साथ साथ अब यहां इस नदी के किनारे मुर्दों को जलाने के बाद राख को इस्तेमाल करने तक सीमित सा हो गया है।आस्था के नाम पर यहां हर साल इस नदी के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है।
इतना ही नहीं धार्मिक आयोजनों और मंदिर की पूजा-अर्चना के नाम पर भी लोग प्रदूषण के भागी बनते चले आ रहे हैं। बताते चलें कि पडरौना नगर से मां दुर्गा को विदा करने के लिए भी हजारों प्रतिमाएं खिरकिया घाट के नदी में विसर्जित की जाती हैं। हर साल इनकी संख्या का इजाफा होता है। इस बार भी शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की प्रतिमाओं में 75 से अधिक प्रतिमाओं के विसर्जन का आंकड़ा है।
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