कुशीनगर : नाव पलटने से बड़ी गंडक में डूब रहे छह ग्वालों को नाविकों ने बचाया

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उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर : कुशीनगर के खड्डा क्षेत्र के छितौनी बांध के सामने बड़ी गंडक नदी में उस पार से दूध लेकर इस पार आ रहे ग्वालों से भरी छोटी नाव नदी में पलट गयी। नाव पर सवार रहे 6 ग्वालों को पानी की धारा में बहते हुए नाविकों ने जान पर खेल कर बचा लिया। बीते मंगलवार को भी ठीक इसी जगह नदी में एक छोटी नाव पलट गयी थी, जिसमें नाव पर सवार पांच किसानों में से दो किसानों की मौत हो गयी थी। इतना बड़ा नाव हादसा होने के बाद भी लोग इससे सबक नहीं ले रहे हैं।
खड्डा थाना क्षेत्र के छितौनी बांध के समीप बसे मदनपुर सुकरौली, भेडियारी, भैंसहा, कोटवा टोला, हनुमानगंज, भगवानपुर सहित आदि गांवों के दर्जनों लोग खेती-बारी व दूध लाने नदी उस पार नाव से आते-जाते हैं। प्रतिदिन की भांति मंगलवार को भी थाना क्षेत्र के मदनपुर सुकरौली गांव के रहने वाले दो भाई लालप्रताप, जितेन्द्र यादव, भेड़ियारी निवासी रामदेनी, देवराज तथा भैंसहा निवासी राजू व जिला यादव छोटी नाव से नदी उस पार मदनपुर मौजा में स्थित घोट्ठे पर दूध लाने गये थे। दोपहर में सभी 6 ग्वाले आठ बड़ी बाल्टी में करीब चार कुंटल दूध छोटी नाव पर लाद कर इस पार आ रहे थे।
भेडियारी ठोकर नं. 4 के समीप नाव तेज धारा की चपेट में आकर पलट गई। इससे नाव पर सवार सभी लोग पानी की तेज धारा में बहते हुए चीखने चिल्लाने लगे। उनके चीखने की आवाज सुनकर घाट पर मौजूद रहे उमेश, बालचरण, रामजी, सत्तन सहित अन्य नाविकों ने चार नाव लेकर उन्हें बचाने पहुंच गये लेकिन नदी की तेज धारा के चलते वे पकड़ में नहीं आ रहे थे।

नाविकों ने घंटों प्रयास कर घटना स्थल से लगभग दो किमी पूरब भैसहा गांव के निकट रेस्क्यू कर सभी 6 ग्वालों को सुरक्षित बचा नदी से बाहर निकाला। इससे एक बड़ा हादसा होने से बच गया। नदी से बाहर निकाले जाने के बाद सभी ग्वालों के चेहरे पर मौत का भय साफ झलक रहा था। इस घटना की जानकारी होने पर छितौनी बांध के ठोकर संख्या 4 व भैसहा गांव तक लोगों का तांता लगा है। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे हल्का दरोगा राजेश कुमार ने लोगों के सहयोग से सभी को उनके घर भिजवाया।

21 अगस्त को पलटी थी छोटी नाव
बीते 21 अगस्त को नदी उस पार जाते समय इसी जगह छोटी नाव पलट गयी थी। इसमें भेड़ियारी निवासी रामदरश की मौत हो गयी। वहीं किसान विजयबहादुर सिंह नदी की धारा मे बहकर लापता हो गया, जिसका आज तक नहीं पता चल सका। वहीं नाव पर सवार तीन अन्य किसान संतोष, नत्थू व कोलाई को नाविकों ने तीन किमी तक बहने के बाद बचा लिया था। इस नाव हादसे के बाद भी लोग अपनी जान जोखिम में डालकर छोटी नाव से उस पार आ जा रहे हैं।

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