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कुशीनगर। बिहार प्रान्त का सीमा और तस्करी का नाता पुराना है। कभी खुशी कभी गम वाली कहानी भी यहां दोहराई जाती रही है। यही कारण है कि डायल 100 और बहादुरपुर चौकी की पुलिस चर्चा में बनी रहती है। शनिवार को प्रातः डायल 100 के एक पुलिस कर्मी के साथ जो घटना हुई, वह भी उसी की एक कड़ी बताई जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार शनिवार को प्रातः एक पिकप बिहार सीमा से लगे ग्राम सिअरहा, सलेमगढ़ के पास रुकी। गांव वाले कुछ समझते तब तक उक्त पिकप से कुछ लोग डायल 100 के एक सिपाही को फिल्मी अंदाज में पीटने लगे। सिपाही को पीटते देख ग्रामीण दंग रह गये, फिर वे शोर के साथ ईंट पत्थर चलाने लगे। ग्रामीण भी उक्त लोगों के पास असलहा न हो इस लिए दूर से ही चारों दिशाओं के ओर फैलना शुरू कर दिया। उधर ग्रामीणों के तेवर को देख पिकप सवार बिहार प्रान्त में भाग खड़े हुए।
जानकर बताते है कि उक्त सिपाही प्रमोद सिंह डायल 100 की गाड़ी संख्या यू.पी.32डीजी/2514 पर तैनात है। प्रातः उन्हें उक्त पिकप टोल प्लाजा टड़वा पर मिला, जिसपर वे सवार हो गए। फिर मोलभाव का क्रम शुरू हुआ, इतने में पिकप बिहार सीमा के नजदीक ग्राम सलेमगढ़ के टोला सिअरहा निवासी खेदन तुरहा के घर के सामने पहुँच गये थे। तभी बात बिगड़ गयी। फिर क्या पिकप पर सवार तस्करों ने उक्त सिपाही को पिकप से उतार फिल्मी स्टाइल में पिटाई शुरू कर दी। यह तो ग्रामीणों की सक्रियता थी कि उक्त सिपाही की जान बच गयी। ग्रामीणों के अनुसार उक्त पिकप पर गौवंश लदे थे, जिन्हें तिरपाल से ढ़का गया था।
इस घटना ने प्रशासन के तस्करी पर प्रतिबंध लगाने का दावा खोखला साबित हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार डायल 100 की गाड़ी (पीआरबी – 2514) 24 घण्टे टोल प्लाजा पर ही मौजूद रहती है। मुख्यालय से मिले शिकायत को जल्दी जल्दी निपटा यह टीम टोल प्लाजा पर पहुँच जाती है। जहां गाड़ियों की जांच और फिर …….?
शुरू हो जाता है। जानकारों के अनुसार बहादुरपुर पुलिस चौकी, तरयासुजान थाने के प्रतिनिधियों के देखरेख में इस टोल प्लाजा पर पूरी रात जांच का खेल चलता है। जिसमें टोल प्लाजा के अधिकारियों की भी हिस्सेदारी बताई जाती है।
उधर थानाप्रभारी तरयासुजान शुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि ऐसी कोई घटना नही हुई है, उक्त सिपाही दुर्घटना में चोटिल हो गए थे, अब वह ठीक है तथा आराम कर रहे है।
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