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पडरौना,कुशीनगर : पूर्ति विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और बिचौलियों के मिलीभगत से कुछ कोटेदारों द्वारा गरीबो के निवले पर डाका डालकर ब्यापक पैमाने पर किये जा रहे खाद्यान्न घोटाले का सनसनीखेज मामला दुदही विकास खण्ड के जंगल नौगांवा में देखने को मिला है जहाँ पर पूर्ति निरिक्षक और कोटेदार द्वारा मिलकर पात्र गृहस्थी राशन कार्ड में लगभग 500 यूनिट राशन गलत नाम फीड कराकर हर माह हजम किया जा रहा है। दुदही इलाके के एक पत्रकार मित्र द्वारा इस गोलमाल के तरफ मेरा ध्यान आकृष्ट कराया गया तो मैंने जंगल नौगांवा के पात्र गृहस्थी कार्ड की स्थिति का नेट पर अवलोकन किया तो यह देखकर हतप्रभ रह गया कि यहाँ पर तो फर्जीवाड़े की इंतहा की गई है। दुदही विकास खण्ड के जंगल नौगांवा में दो कोटेदार नियुक्त है जिसमे श्रीकांत ओझा और बीरबल भारती है।
इनमें से 2076 लाभर्थियों के सापेक्ष पात्र गृहस्थी का 424 राशन कार्ड श्रीकांत ओझा और और 1847 लाभार्थियों के सापेक्ष 422 राशन कार्ड बीरबल भारती के दुकान पर आवंटित हुआ है। श्रीकांत ओझा के दुकान से सम्बंधित पात्र गृहस्थी के राशन कार्ड का अवलोकन किया गया तो उसमे यह देखकर आँखे फ़टी रह गयी कि एक ही राशन कार्ड में निषाद ,शर्मा और अल्पसंख्यक जाति के लोग तथा एक ही राशन कार्ड में यादव और कुशवाहा और हिन्दू और मुसलमान शामिल है अब आप ही अंदाजा लगा लीजिये कि एक ही परिवार में निषाद, शर्मा और अल्पसंख्यक जाति के लोग कैसे हो सकते है। एक राशन कार्ड में होता तो यह माना जाता कि यह फीडिंग के दौरान मानवीय त्रुटि है लेकिन इस दुकान में ऐसे लगभग 5 सौ नाम गलत जोड़कर 5 सौ यूनिट राशन का गोलमाल किया जा रहा है। इस जगह पर एक एक राशन कार्ड का विवरण नही दिया जा सकता है और सूची में बहुत सारे कार्डो में गलत नाम फीड किये गए है लेकिन मैं साक्ष्य के तौर पर लगभग दर्जन भर कार्डो को पोस्ट कर रहा हु और जो फर्जीवाड़ा हुआ है उसको दर्शाने के लिए उसे लाल और नीले कलर के घेरे से घेर दिया हु जिससे कि लोगो को फर्जीवाड़ा समझने में आसानी हो। ऐसा सिर्फ एक गांव में नही हुआ है बल्कि इस विकास खण्ड में ऐसी शिकायत आम है ।
पूर्ति निरीक्षक ने इस विकास खण्ड के ग्रामसभा ठड़ीभार के 70 राशन कार्डों को काटकर उसे सेवरही के गाजीपुर ग्रामसभा में जोड़वाने का कारनामा कर दिखाया था सिर्फ यही नही बड़हरा बुजुर्ग में भी 24 अंत्योदय राशन कार्ड को भी साहब ने काट दिया है और उसके जगह पर उन लोगो का पात्र गृहस्थी का कार्ड भी नही बना है जिससे वह लोग आज संकट के समय मे दाने दाने को मोहताज है। तहसील मुख्यालय के समीप हाइवे पर पूर्ति निरीक्षक दुदही ने आवास ले रखा है और उसी में कुछ प्राइवेट लोगो को रखकर राशन कार्ड में नाम कटवाने और जोड़वाने का खेल साहब द्वारा खेला जाता है। इस घोटाले पर साहब और कोटेदार पर हो सकता है कि कोई कार्यवाही न हो क्योंकि वह लोग प्रभाव और पैरवी वाले लोग है और पैरवी और प्रभाव के बलबूते वह जिम्मेदार लोगों को मैनेज करने में माहिर माने जाते है। अगर सही ढंग से जांच हो तो दुदही विकास खण्ड में ब्यापक पैमाने पर हो रहे खाद्यान घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है और उसमे कई एक साहब लोगो का गर्दन नप सकता है जिसमे सबसे पहले पूर्ति निरीक्षक दुदही का ही नाम आएगा। इस महामारी के दौरान राशन के मामले को लेकर मिल रही तमाम शिकायतों पर एसडीएम साहब तो ऐसे चुप्पी साध रखे है जैसे उनकी कुछ जिम्मेदारी ही नही न एक दिन गोदामो की जांच और न ही एक भी कोटे की दुकान की जांच सिर्फ आवास में बैठकर रिपोर्ट पर निलंबन की कार्यवाही और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराने का काम कर रहे है।
जब एसडीएम साहब की ही कार्यशैली ऐसी है तो पूर्ति निरक्षक लोग तो हर बार की भांति इस बार भी सिर्फ पैसा बनाने के खेल में जुटे हुए है जनता जाए भाड़ में। सीएम साहब का लॉक डाउन के दौरान 40 जनपदों के खराब परफॉर्मेंस में कुशीनगर जनपद के नाम यू ही नही शामिल है बल्कि हक़ीक़क्त है कि यहाँ पर जिम्मेदार लोग आवास में बैठकर समय काट रहे है और सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है।
क्या कहते है डीएसओ कुशीनगर
डीएसओ कुशीनगर विमल शुक्ला का मानना है कि यह भारी अनियमितता है इसको अभी तुरन्त दिखवाता हु ,मामले में जो भी आवश्यक होगा वह कार्यवाही की जाएगी।
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