कुम्भ में बड़ी वारदात की तैयारी में थे बावरिया गिरोह के सदस्य, इनके हैरतअंगेज खुलासे

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 कानपुर। प्रयागराज में आयोजित कुंभ में बावरिया गिरोह का साया पड़ गया है। रात पुलिस ने 11 संदिग्धों को गिरफ्तार किया तो सभी सदस्य बावरिया गिरोह के निकले। इन सभी शातिरों ने कुंभ में वारदातों को अंजाम देने के लिए प्रयागराज जाने की तैयारी करने व तीस सदस्य पहले से वहां पर होने की जानकारी दी है।

शहर में बावरिया गिरोह के सदस्यों की आमद की सूचना पर पुलिस सक्रिय हो गई थी। रात वाहन चेकिंग के दौरान महाराजपुर पुलिस ने दो कारों को पकड़ा। कार में एक दर्जन महिला व पुरुष सवार थे, जो सभी हरियाणा राजस्थान सीमवर्ती इलाकों के रहने वाले हैं। पुलिस की पूछताछ में उन्होंने प्रयागराज जाने की बात कही।

कार के अंदर गांजा, चार सरिया, पेचकस, हथौड़ी व अन्य उपकरण मिले। प्रयागराज में वह कहां और किस जगह जा रहे हैं? इसका संतोषजनक जवाब नहीं दे सकने पर पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया। पकड़े गए लोगों के बावरिया या टप्पेबाज गिरोह के सदस्य होने की आशंका पर पड़ताल शुरू की गई।

गहन पूछताछ के बाद सभी सदस्य बावरिया गिरोह के निकले। इनमें छह महिलाएं भी शामिल हैं। उनके कब्जे से एक सौ सत्तर ग्राम चरस, नकब लगाने के औजार, मोबाइल फोन, फर्जी नंबर प्लेट लगी एक कार आदि बरामद किया गया है।

पुलिस के अनुसार पकड़े गए शातिरों ने बताया कि सभी कुंभ में वारदातों को अंजाम देने के इरादे से जा रहे थे। कुंभ में पहले से उनके गिरोह के तीस सदस्य ट्रेन से पहुंच चुके हैं। गिरोह के सदस्यों से मिली जानकारी के बाद एसएसपी ने इलाहाबाद पुलिस से संपर्क करके जानकारी दी है।

बावरिया गैंग की कुछ खास बातें.

आखिर क्या है बावरिया. कौन होते हैं यह  बावरिया लोग. क्या करते हैं, कहां रहते है और कहां से आएं है. इस तरह के सैकड़ों सवाल हैं जिनका जवाब हर कोई जानना चाहता है. जब हमने इस गैंग के बारे में जानने की कोशिश की तो कई हैरतअंगेज खुलासे हुए. आइए आपको बतातें हैं बावरिया गैंग की कुछ खास बातें …

– बावरिया एक विशेष जनजाति का नाम है. इस समुदाय के लोग खानाबदोश जीवन जीते हैं. यह जनजाति तकरीबन साढ़े तीन सौ साल पहले चित्तौड़गढ़ से विस्थापित हो गई थी. इस समुदाय का मूल मुख्य रूप से भरतपुर (राजस्थान) के पास है. इसके बाद ये लोग देशभर में फैल गए।

– इस जनजाति के लोगों का मुख्य काम ही लूटपाट  को अंजाम देना हैं. बावरिया जनजाति ब्रिटिशकाल से ही लूटपाट में संलिप्त थी, इसीलिए इन्हें अपराध संलिप्त जातियों की श्रेणी में रखा गया था. ये जनजाति लूटपाट, चोरी, अवैध शराब की बिक्री जैसे काम करती थी लेकिन हाल ही में इन्होंने गैंगरेप जैसी वारदातों को भी अंजाम दिया है।

– इस जानजाति के लोग धर्म-आस्था में काफी विश्वास करते हैं. हर वारदात से पहले वे अपनी कुलदेवी की पूजा करतें हैं. इनके वारदात को अंजाम देने का दिन भी काफी धार्मिक और अंधविश्वासी रुप से चुना जाता है. इन्हें एक बकरा बताता है कि लूट करनी है या नहीं।

– इस गिरोह के लोग एक बकरे को अपनी कुलदेवी की मूर्ती के सामने खड़ा कर देते हैं. अगर वह मूर्ती के करीब जाता है तो गिरोह उस दिन वारदात करता है और अगर वह बकरा मूर्ती की तरफ नहीं जाता तो उस दिन को अपशकुन मानते हुए ये किसी भी वारदात को अंजाम नहीं देते।

– वारदात को अंजाम देने से इस गिरोह के सदस्य अपने पूरे शरीर पर तेल मलते हैं. ताकि पकड़े जाने पर फिसलन की वजह से आसानी से बच निकलें. यह गिरोह जब भी लूट को अंजाम देता है तो सिर्फ नगदी और गहने ही लूटता है बाकी किसी भी चीज को हाथ नहीं लगाता।

– लूटपाट और चोरी की वारदात को अंजाम देने वाली यह जनजाति धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में आगे बढ़ गई है. यही वजह है कि ये अब रेप जैसी घिनौनी वारदात को भी अंजाम देने लगे हैं. पुलिस इस जनजाति के लोगों पर विशेष नजर रखने लगी है।

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