कश्मीरी पंडित किरण और रोहिणी बोलीं- हक से जा सकेंगे अब कश्मीर

[object Promise]

केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद इसका दंश झेल रहे लोगों ने राहत की सांस ली। लोगों में आस जगी है कि अब वह फिर से कश्मीर में अपना हक पा सकेंगे। ऐसे ही दो कश्मीरी पंडित परिवार की महिलाएं यहां सहारनपुर और बागपत में रहती हैं, जो अब इस फैसले के बाद बेहद खुश हैं। दोनों ने कहा कि अब हक से कश्मीर जा सकेंगे।

सहारनपुर जनपद के मोधोनगर निवासी रोहिणी जब अपने बचपन को याद करती हैं तो वह सहम जाती है। बताती हैं कि उनका परिवार पुलवामा का कश्मीरी पंडित है। 1990 की बात है, उस समय उनकी उम्र मात्र पांच-छह साल थी। कश्मीर में हालात बिगड़ने लगे थे। कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार बढ़ रहे थे। उनके कई रिश्तेदारों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उनके पिता गोपीनाथ भान परिवार को लेकर पुलवामा से उधमपुर चले आए। मम्मी पुलिस में थीं तो वे वहीं पर रहीं। जबकि, वह उधमपुर शिविर में ठहरे थे। वहां पर उनका बचपन बीता था। स्कूल की शिक्षा भी टेंट में ही हुई। इसके बाद उनके पापा ने जम्मू में कारोबार शुरू किया था, जहां पर परिवार शिफ्ट हो गया। रोहिणी भान की शादी 2006 में सहारनपुर निवासी गौरव बांगा के साथ हुई, जिसके बाद उनके कश्मीरी होने के अधिकार छिन गये। सोमवार को जब केंद्र सरकार के फैसले की जानकारी मिली तो उन्हें बेहद खुशी हुई। उनका कहना है कि अब उन्हें भी मायके में अधिकार मिलेंगे।

बागपत जनपद के खेकड़ा क्षेत्र के जैन एकेडमी सीनियर सेकेंड्री स्कूल की प्रधानाचार्य किरण मट्टू एक कश्मीरी पंडित परिवार से हैं। धारा 370 हटाने के निर्णय का स्वागत करते हुए किरण मट्टू कहती हैं कि ये ऐतिहासिक निर्णय है, जिसको लेने का हौसला मोदी सरकार ने दिखाया है। किरण मट्टू ने बताया कि उनका परिवार श्रीनगर के बारामूला में रहता था। डरावना माहौल और घर खाली न करने पर मौत की धमकियों के बीच परिवार रह रहा था। कत्लेआम की कई घटनाओं के चलते हम लोग 1990 में अपना घर जमीन सबकुछ छोड़कर आने को मजबूर हुए। तत्कालीन दिल्ली सरकार ने दो माह में वापस घाटी में बसाने का आश्वासन दिया, लेकिन 28 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज भी हम अपनी जन्मभूमि से दूर रहने को मजबूर हैं। किरण मट्टू ने विश्वास जताया कि केन्द्र की मोदी सरकार के ऐतिहासिक कदम से कश्मीर में रह रहे लोगों व बेघर परिवारों को राहत मिलेगी।

 

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *