वाराणसी : बनारस के नदेसर स्थित छोटा कटिंग मैदान में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के बिगड़े बोल प्रदेश सरकार तक पहुंच गए हैं। उनके इस रवैये से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के कई मंत्री व पदाधिकारी बेहद नाराज हैं। नाराजगी इतनी कि मुख्यमंत्री ने बनारस प्रवास पर आए स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह से रविवार की देर रात ही फोन पर बात की और स्पष्ट किया कि किसी भी हालत में दबाव की राजनीति नहीं चलेगी। मुख्यमंत्री का संकेत मिलते ही स्वास्थ्य मंत्री ने भी अपने तेवर बदल दिए। सोमवार की सुबह सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के बिगड़े बोल को लेकर दो टूक कहा कि प्रदेश सरकार में शामिल सहयोगी दल की ओर से जो दबाव की राजनीति की जा रही है वह नहीं चलेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने सुभासपा प्रमुख का नाम लिए बिना कहा कि दबाव की राजनीति से योगी सरकार डरने वाली नहीं है। जो दल यह समझकर अनरगल आरोप लगा रहे हैं उनकी समझ गलत है। यदि कोई परेशानी है तो आपस में बैठकर सुलझा लेना सभी के लिए हितकर होगा।
चलेगा भाजपा का धोबी पाट :
स्वास्थ्य मंत्री ने बातों-बातों में जो संकेत दिए उससे यही अनुमान लगाया जा रहा है कि सहयोगी दल के तौर पर प्रदेश सरकार में शामिल सुभासपा को भाजपा के बड़े दांव का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार भाजपा ने राजनीति का जो धोबी पाट दांव महाराष्ट्र में मारा था और सहयोगी दल शिवसेना चित हो गई थी, कमोबेश उप्र में सुभासपा के खिलाफ भी पार्टी वही दांव मार सकती है।
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दल में भरोसा अब दूर की बात : प्रदेश सरकार में भाजपा के सहयोगी दल सुभासपा पर भरोसा अब दूर की बात हो गई है। इसकी वजह सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर की ओर से अब तक चले राजनीतिक दांव हैं। पहले बसपा तो फिर सपा के साथ भी उन्होंने दबाव की राजनीति की थी। इसके बाद विधानसभा चुनाव से लगायत प्रदेश सरकार में शामिल होने तक उनकी ओर से दबाव की राजनीति होती रही। इसे देखते हुए अब भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी उन पर भरोसा करने की स्थिति में नहीं हैं।
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