एक ऐसा मंदिर हैं जहां महिलाएं चढ़ावे के तौर पर फेंकती हैं अंडे

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आगरा। भारत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक तौर पर एक उन्नत देश माना जाता है, जो विश्व स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल हो पाया है। यहां असंख्य देवी-देवताओं और उनसे जुड़े धार्मिक स्थलों की कमी नहीं है।

आमतौर पर किसी पर अंडे फेंकना विरोध का या अपमानित करने का प्रतीक माना जाता है। लेकिन फिरोजाबाद में एक ऐसा गांव हैं जहां के एक मंदिर में महिलाएं चढ़ावे के तौर पर अंडे फेंकती हैं और अपने बेटों की लंबी उम्र की दुआएं मांगती हैं। यह मंदिर है बाबा नागर सेन का।

खासकर भारत का हिन्दू समाज अपनी धार्मिक व परंपरागत रीति रिवाजों का पालन करने में ज्यादा सक्रिय है। यहां गरीब हो या अमीर, समाज का बड़ा तबका हो या निचला धार्मिक कर्मकांड से ये काफी गहराई से जुड़े हुए हैं।

लोग बताते हैं कि यह लगभग एक सदी पुरानी पंरपरा है। हर साल बैसाख महीने में बिलहना गांव में तीन दिन का एक मेला लगता है। इस साल यह मेला 27 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच लगा था।

किसी को निश्चित रूप से नहीं पता कि बाबा नागर सेन मंदिर में अंडे फेंकने की प्रथा कब शुरू हुई। लोगों में ऐसा विश्‍वास है कि ऐसा करने से अंडे के अंदर जो जीव होता है उसकी उम्र भी उनके लड़के की उम्र में जुड़ जाती है। इसलिए आप जितने अंडे चढ़ाएंगे बेटे की उतनी ही उम्र बढ़ जाएगी।’

शैलेंद्र ने आगे बताया, ‘यहां तक कि जिन दंपतियों के बच्‍चे नहीं है वे भी मंदिर की दीवार पर अंडे फेंकते हैं। हर साल वैशाख के महीने में तीन दिनों के लिए बड़ी संख्‍या में महिलाएं आकर बाबा को अंडे चढ़ाती हैं।’

इनमें से एक भक्‍त सुनीता कुमारी कहती हैं, ‘मैंने अपने छह और नौ साल के बच्‍चों की स्‍वस्‍थ और लंबी आयु के लिए यहां प्रार्थना की है।’ एक बेटा और एक बेटी की मां सुनीता का कहना है, ‘दूसरे देवताओं की तरह, जहां हम नारियल, फूल, फल और मिठाई चढ़ाते हैं, बाबा नागर सेन मंदिर पर हम अंडे चढ़ाते हैं।’

नीतू शाक्‍य आठ महीनों की गर्भवती हैं, वह पहली बार मां बनने वाली हैं। नीतू कहती हैं, ‘आप इसे अंधविश्‍वास कहें या कुछ और लेकिन मुझे केवल एक स्‍वस्‍थ बच्‍चा चाहिए। इसीलिए मैं मंदिर में अंडे चढ़ाना चाहती हूं।’

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