इस गुंगे को गला तो नही दी पर उपर वाले ने दे दी कला

[object Promise]
पडरौना,कुशीनगर : आलीशान बंगलों पर सजी चाइनीज लड़ियां बेशक लोगों के मन को खूब भाती हों, लेकिन इन बंगलों के नीचे भारतीय परंपरा को निभाते आ रहे कुंभकारों की माटी दबी पड़ी है। ढाई से 3 हजार रुपए में चिकनी मिट्टी ट्राली रेत खरीदकर दिए बनाकर कुम्हार मुनाफा नहीं कमा रहा, बल्कि अपनी संस्कृति,रीति-रिवाज को जीवंत रखने का काम कुशीनगर मे एक दश वर्षिय मुकबधिक बालक कर रहा है। इस बालक को उपर वाले ने भले ही गला नही दिया पर कला एेसी दी है की अपनी जाती के परंपरा बरकार कर रहा है ।

 

बताते चले की कुम्हारों को आस-पास की जगह से ही दिए बनाने के लिए चिकनी मिट्टी आसानी से फ्री में उपलब्ध हो जाती थी,वहीं अब इस मिट्टी की मोटी कीमत चुकानी पड़ती है। वहीं इस मिट्टी से तैयार एक 2 रुपए के दीपक को खरीदते समय लोग मोल-भाव भी करना नहीं भूलते।
कुम्हारों की माने तो पहले किसी आस-पास के गांव के खाली जगह से वे दीपक बनाने के लिए चिकनी मिट्टी खोद लिया करते थे। लेकिन अब उन जगहों पर आलीशान बंगले बन गए हैं, या फिर किसी के गांव या खेत में चिकनी मिट्टी उपलब्ध है, तो वे इसका व्यापार करते हैं। पडरौना के समीप पड़ने वाले सिधुआ स्थान गांव से अधिकतर कुम्हार इस सीजन में चिकनी मिट्टी मंगवा कर दीपक बना रहे हैं।

 

मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुंभकार मुकबधिर बालक मन्नु की व्यथा सुनते हैं, तो पता चलता है कि हमारी एक छोटे से दीपक को बनाने में मिट्टी लाने से लेकर दीपक भट्टी में तपाने तक कितना बड़ा संघर्ष होता है। तब जाकर कहीं हम अपनी संस्कृति को निभा पाते हैं। समय के साथ दीपक की जगह कृत्रिम रोशनी की लड़ियां आ गई। लेकिन इस सब के बावजूद कुंभकार समाज मायूस नहीं हुआ। कुम्हारों की सोच की बात करें तो, उनका यही कहना है कि चिकनी मिट्टी चाहे जितनी महंगी मिले, मेहनत चाहे दोगुनी लगे, लेकिन वे अपनी हस्तकला और भारतीय रीत-रिवाज के अभिन्न अंग दीपक की चमक को कम नहीं होने देंगे। पहले की तुलना में अब यह कारोबार केवल ऑन सीजन का ही रह गया है। अब लोग होली, दीपावली पर ही महज खानापूर्ति के लिए मिट्टी से बने बर्तन खरीदते हैं। लेकिन कुंभकार आज भी उतनी ही शिद्दत से मिट्टी के दीपक को अपनी पेट की आग में पकाकर हमें हमारी संस्कृति लौटाने का काम कर रहे हैं।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *