प्रयागराज । कोरोना पॉजिटिव पाए गए लूकरगंज के आर्किटेक्ट ने लॉकडाउन के दौरान शहर में घूम-घूम कर सैकड़ों लोगों को खाना बांटा है। चाहे चौराहों पर तैनात पुलिस कर्मी हों या फिर बस्तियों में राहत के इंतजार में टकटकी लगाए लोग। वे ऐसे लोगों के बीच सुबह से शाम तक खाना पहुंचाते थे। इस दौरान वह कहां-कहां और कितने लोगों के संपर्क में आए? यह सवाल अब पहेली बन गया है। फिलहाल अब उनकेकोरोना पॉजिटिव आने के बाद सैकड़ों लोग दहशत में हैं।
लूकरगंज के आर्किटेक्ट लॉकडाउन के दौरान शहर के कई इलाकों में जरूरतमंदों को लगातार खाना बांट रहे थे। वह कब और कैसे कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए, इसे लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि बीते 15 अप्रैल को उनका एक करीबी रिश्तेदार दिल्ली से ई-पास के जरिए लूकरगंज स्थित उनके घर पर आया था। इसके बाद 28 अप्रैल से उन्हें हल्के बुखार और जुकाम की शिकायत होने लगी। इसके बाद बुधवार को वे कालिंदीपुरम स्थित इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन सेंटर पर चले जांच कराने के लिए गए। बृहस्पतिवार को उनका स्वाब सैंपल मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। शुक्रवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद हड़कंप मच गया है।
लॉकडाउन में फंसे लोगों की मदद के लिए लगातार जूझते रहने की वजह से उनको कोरोना योद्धा के तौर पर सराहा जा रहा था। बताते हैं कि वह सुबह से शाम तक लोगों को खाना बांटते थे। सुबह वह जब घर से निकलते थे, तो कोई भी ऐसा चौराहा नहीं होता था, जहां रुककर ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों को बिस्कुट व पानी की बोतलें न देते रहे हों। इसके अलावा लूकरगंज, करेली, लीडर रोड, अब्दुल्ला मार्केट, नखास कोहना, परेड समेत कई इलाकों में वह नियमित जरूरतमंद लोगों और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को खाने के पैकेट पहुंच रहे थे। अब उनकेकोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद ऐसे लोगों के माथे पर बल पड़ गए हैं।
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