आगरा के अनाथ बच्चों की मदद को देश-विदेश से आगे आये लोग

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मां के गायब होने और पिता को रेप के आरोप में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद रद्दी बेचने को मजबूर आगरा के दो अनाथ बच्चों की मदद के लिए देश-विदेश के कई लोगों ने इच्छा जताई है। बच्चों से जुड़ी खबर शनिवार को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित होने के बाद कई लोगों ने नाबालिग अनाथों की शिक्षा और अन्य आधारभूत जरूरतों के लिए फंडिंग की पेशकश की है।

रद्दी बेचकर भरते हैं पेट
शनिवार को टीओआई में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया था कि आगरा के रहने वाले 13 और 8 साल के दो नाबालिग बच्चों के पिता को अपनी ही बेटी के रेप और हत्या के मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा बच्चों की मां साल 2013 से ही लापता है। ऐसे में इन अनाथ बच्चों को रद्दी बेचकर अपना पेट पालना पड़ता है। इस मुश्किल दौर में बच्चों के पड़ोस में रहने वाली एक महिला उनके खाने-पीने का इंतजाम करती है। बदले में दोनों बच्चे उन्हें अपनी दिन भर की कमाई सौंपते हैं।

देश-विदेश से लोगों ने की मदद की पेशकश
रिपोर्ट के सामने आने के बाद देश और विदेश के कई लोगों ने बच्चों की मदद के इच्छा जाहिर की है। गोवा के रहने वाले अविनाश द्विवेदी ने सबसे पहले ऐसी स्टोरी सामने लाने के लिए टीओआई की तारीफ की है। उन्होंने दोनो जरूरतमंद बच्चों की मदद की भी पेशकश की है। इनके अलावा नैरोबी (केन्या) में रहने वाले मुरादाबाद के सलीम अकरम ने कहा कि वह दोनों बच्चों के सभी खर्च उठाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह बच्चों की उचित शिक्षा, खाना और रहने आदि की व्यवस्था करेंगे।

एडीजी ने दिया मदद का आश्वासन
ऐसे ही जमशेदपुर के रहने वाले निरूप महंती ने भी बच्चों की मदद के लिए उनके बारे में जानकारी मांगी है। अच्युतम कुट्टी नाम के रीडर ने कहा कि वह बच्चों को 3 हजार रुपये प्रति माह दे सकते हैं और तत्काल में उनके लिए गर्म कपड़े और कंबल इत्यादि का इंतजाम कर सकते हैं। वहीं, आगरा के एडीजी ने भी बच्चों की हरसंभव मदद के लिए आश्वासन दिया है। जब इस मामले में अडिशनल डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट केपी सिंह से बात की गई तो उन्होंने आश्वासन दिया कि वह निश्चित रूप से बच्चों के लिए कुछ करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी इस बारे में आगरा के जिलाधिकारी एनजी रवि से बात हुई है।

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