Rajasthan News जयपुर । अगर आप बाजार में कोई मशीन खरीदने जाते हैं तो सबसे पहले देखें कि मशीन प्रमाणित है या नहीं। ऐसा तभी करें जब मशीन खरीदें। चाहे वह घरेलू उपकरण हो या व्यवसाय के लिए उपयोग की जाने वाली मशीन। बड़ी बात यह है कि उदयपुर का कृषि विश्वविद्यालय ऐसी कंपनियों को प्रमाण पत्र जारी करता है, तभी ये कंपनियां अपना माल बाजार में बेच पाती हैं। परीक्षण प्रयोगशाला महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में है।
कृषि मशीनरी का परीक्षण
महाराणा प्रताप कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) के कुलपति SS राठौड़ ने कहा है, कि देश में फार्म मशीनरी परीक्षण केंद्र की एक अलग पहचान है। यहां कृषि मशीनों की जांच की जाती है और प्रमाण पत्र प्राप्त किए जाते हैं। यहां राजस्थान में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब के साथ-साथ कृषि यंत्र बनाने वाली कंपनियां यहां से अपनी मशीनों का परीक्षण करवाती हैं।
मान्यता प्राप्त केंद्र से ही सब्सिडी पर खरीद
SS राठौड़ ने बताया है, कि सरकार ने किसानों को कई योजनाओं में सब्सिडी दी है, जिसमें एक कृषि मशीनरी की खरीद पर भी शामिल है। सरकार किसानों को केवल उन्हीं मशीनों पर सब्सिडी देती है, जिनके पास किसी मान्यता प्राप्त केंद्र से प्रमाण पत्र होता है। यहां यूनिवर्सिटी साइज के हिसाब से उपकरणों की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के एवज में डेढ़ लाख तक फीस लेती है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक देशभर में ऐसे 29 सेंटर हैं।
सुरक्षा मानकों का रखा जाता है ध्यान
MPUAT के अनुसंधान निदेशक डॉ एसके शर्मा ने बताया कि राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र की कंपनियां अपने उपकरणों का परीक्षण करने के लिए केंद्र में आती हैं। पिछले वर्ष थ्रेशर, MB हल, कल्टीवेटर जैसे 97 यंत्र परीक्षण के लिए आए थे। इनमें से 56 को गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन करने के बाद प्रमाण पत्र मिला। शेष उपकरणों का परीक्षण इसी वित्तीय वर्ष में किया जाएगा।
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