India vs South Africa: अलग हैं टेस्ट सीरीज में रहाणे और रोहित के ‘टारगेट’

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मुंबई के दो सबसे शानदार बल्लेबाजों में शुमार रोहित शर्मा और अजिंक्य रहाणे पर साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2 अक्टूबर से शुरू हो रही टेस्ट सीरीज में खास निगाह होगी। दोनों ही बल्लेबाजों पर अलग तरह का दबाव है। एक ओर इस सीरीज को रोहित के लिए टेस्ट क्रिकेट में अपनी जगह पक्की करने के आखिरी मौके के रूप में देखा जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर रहाणे अपने प्रदर्शन द्वारा छोटे प्रारूप में एंट्री की कोशिश करेंगे। रोहित T20I और ODI में बड़ा नाम है। सीमित ओवरों के खेल में वह विराट कोहली के डेप्युटी हैं। हालांकि टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी है। वह अभी तक लाल गेंद के प्रारूप में भारतीय टीम का अहम हिस्सा नहीं हो पाए हैं। उन्होंने 2013 में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। तब से लेकर अभी तक उन्होंने 27 टेस्ट मैचों में टीम का प्रतिनिधित्व किया है।

इस बीच रहाणे को वर्ल्ड कप की टीम से बाहर रखा गया था। बाद में जब टीम के खिलाड़ी इंग्लैंड में चोटिल हो रहे थे तब भी उनके नाम पर विचार नहीं किया गया। बल्कि मयंक अग्रवाल और ऋषभ पंत को टीम को इंग्लैंड भेजा गया। उनका टेस्ट फॉर्म भी बहुत अच्छा नहीं चल रहा था। यहां भी उनकी जगह पर कुछ सवाल उठने शुरू हो गए थे लेकिन वेस्ट इंडीज के खिलाफ पिछले महीने लगाई गई सेंचुरी से उन्हें काफी फायदा हुआ।

अब साउथ अफ्रीका के खिलाफ दो अक्टूबर से शुरू हो रही सीरीज में भारत के इन प्रतिभाशाली बल्लेबाजों के पास अगले पड़ाव पर जाने का बहुत अच्छा मौका होगा।

“‘मैंने सोचा कि मैं अपने वक्त का सदुपयोग कर क्रिकेट और जीवन के बारे में काफी कुछ सीख सकता हूं। काउंटी क्रिकेट खेलना एक बिलकुल ही अलग अनुवभव है। यहां हमें चीजें आसानी से मिल जाती हैं, वहीं काउंटी में आपको सभी चीजें अपने आप करनी पड़ती हैं। क्रिकेट के अलावा कई अन्य चीजों ने मेरी काफी मदद की। मैंने वहीं विचार किया कि जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया तब नतीजे से ज्यादा खेल का आनंद लेना मेरा मुख्य था। जब आप नतीजे के बारे में सोचते हैं तो खुद पर दबाव डालते हैं।’”-काउंटी मे खेलने पर अपने अनुभव पर अजिंक्य रहाणे

रहाणे ने एक कार्यक्रम में कहा भी कि रोहित जैसी प्रतिभा को बाहर बैठे देखना काफी मुश्किल था। रहाणे ने कहा, ‘सच बताऊं तो मैं नहीं जानता कि रोहित पारी की शुरुआत करेंगे अथवा नहीं। लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं तो मैं उनके लिए बहुत खुश होऊंगा। मैंने वेस्ट इंडीज में भी ऐसा कहा था। रोहित जैसी खास प्रतिभा को मैदान पर न देखना काफी निराशाजनकर होता है।’

सिलेक्टर्स ने रोहित को पहले ही साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में बतौर सलामी बल्लेबाज आजमाने का फैसला किया है। मध्यक्रम में रोहित ने 47 पारियों में 39.62 के औसत से रन बनाए हैं लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर वह टेस्ट क्रिकेट में सीमित ओवरों जैसा प्रभाव छोड़ पाने में असफल रहे हैं। उनके बारे में आम राय यह है कि वह टेस्ट क्रिकेट में भी बहुत जल्दी शॉट खेलने लग जाते हैं। रहाणे को हालांकि लगता है कि रोहित एक मेहनती खिलाड़ी हैं और अगर उन्हें मौका दिया जाता है तो वह अच्छा प्रदर्शन करेंगे।

रहाणे ने कहा था, ‘हम सब जानते हैं कि रोहित किस क्वॉलिटी के बल्लेबाज हैं। सीमित ओवरों के प्रारूप में आप जाते ही आक्रामक क्रिकेट खेल सकते हैं। लेकिन टेस्ट क्रिकेट में सारा खेल मानसिक स्थिति का है। जब दो गेंदबाज अच्छा स्पैल फेंक रहे हों तो एक बल्लेबाज के रूप में आपको उन्हें सम्मान देना चाहिए। आपको उन स्पैल के खत्म होने का इंतजार करना चाहिए और फिर अपना खेल खेलना चाहिए।’

रहाणे ने अपना आखिरी वनडे इंटरनैशनल मैच 18 महीने पहले साउथ अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन में खेला था। 50 ओवरों के खेल में वापसी करने की उनकी चाहत को वह छुपाते नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं ODIs में वापसी करना चाहता हूं। हालांकि फिलहाल मेरा पूरा ध्यान साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज पर है।’

अनुभवहीन साउथ अफ्रीकी टीम के खिलाफ भारतीय टीम को फेवरिट माना जा रहा है। रहाणे को लगता है कि कागिसो रबाडा और केशव महाराज भारतीय टीम को चुनौती दे सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘रबाडा एक शानदार गेंदबाज हैं। वह विकेट लेने वाले बोलर हैं। विकेट कैसा भी वह विकेट ले सकते हैं। हमें उन्हें और बाकी गेंदबाजों को सम्मान देना होगा। उनका पास तुलनात्मक रूप से युवा टीम है लेकिन उनका गेंदबाजी आक्रमण- तेज गेंदबाज और स्पिनर्स के पास अनुभव है। केशव महाराज ने काउंटी क्रिकेट खेला है और लाल गेंद से उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है। तो, हमें उन्हें सम्मान देना होगा।’

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