जिग्नेश, उमर, कन्हैया और शहला रशीद एक ही मां के बेटे हैं , जानिए कौन है ये औरत

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पिछले साल अगस्त में हुए उना कांड के बाद चर्चा में आए जिग्नेश मेवाणी अब वडगाम से एक विधायक बन गए हैं। उना कांड में जिग्नेश ने लगभग 20 हजार दलितों को एक साथ मरे जानवर न उठाने और मैला न ढोने की शपथ दिलाई थी। मेवाणी ने कहा था की दलित अब सरकार से अपने लिए दूसरे काम की बात करेंगे।

इस दौरान जिग्नेश मेवाणी ने ‘दलित अस्मिता यात्रा’ भी निकाली। इसी यात्रा की अहमदाबाद में समाप्ति थी और एक जनसभा का रूप दिया गया। जिसमें पहली बार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उमर खालिद ने भी शिरकत की।

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Gauri lankesh
ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट मुकुल सिन्हा के ‘जन संघर्ष मंच’ को भी जिग्‍नेश ने ज्वाइन किया था।  इसके साथ ही मेहसाणा जिले में जन्मे जिग्नेश ‘आजादी कूच आंदोलन’ चला चुके हैं। जिसमें 20 दलितों  के साथ मिलरकर मरे जानवरों को ना उठाने और मैला ना ढोने की शपत दिलाई थीदौरान उन्होंने दंगा पीड़ितों और वर्कर यूनियन के लिए लड़ाई लड़ी। बाद में आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता बने।
राज्य में दलितों का वोट प्रतिशत करीब सात फीसदी है। जिग्नेश दलित आंदोलन के दौरान एक काफी पॉपुलर नारा दिया था। ‘गाय की पूंछ तुम रखो हमें हमारी जमीन दो’ इस सभा में रोहित वेमुला की मां भी शामिल हुई थी। इस सभा दलित, पिछड़े और मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले युवा नेता भी शामिल हुए। इसके अलावा भी जिग्नेश मेवाणी और कन्हैया कुमार ने कई रैलियों को एक साथ संबोधित किया है।

इस सभा में साथ आने के बाद जिग्नेश मेवाणी का कद गुजरात के साथ-साथ जेएनयू में भी बढ़ा। जिग्नेश मेवाणी प्रचार-प्रसार के लिए जेएनयू आने लगे। उन्हें यहां होने वाली सेमिनारों में बुलाया जाने लगा।

जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष शेहला रशीद ने जिग्नेश मेवाणी को चर्चाओं और सेमिनार में बुलाया। आज हुई ‘युवा हुंकार रैली’ का पूरा आयोजन और समर्थकों को जुटाने का पूरा जिम्मा शेहला रशीद ने उठाया। जब रैली को परमिशन नहीं मिली तो ट्वीट के माध्यम से दिल्ली पुलिस को प्रतिक्रिया दी।

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जेएनयू के ही एक छात्र और हैं उमर खालिद। उमर खालिद के साथ जिग्नेश मेवाणी पिछले एक साल से टच में है। शौर्य दिवस को भीमा कोरेगांव में हिंसा हुई।  पुलिस का आरोप है कि उमर खालिद और जिग्नेश मेवाणी ने 31 दिसंबर को आयोजित एक कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण दिया और इसी वजह से 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़की।

इसके अलावा जेएनयू के इन तीनों छात्रों और जिग्नेश मेवाणी का एक और संबंध। ये सभी एक ही मां के बेटे हैं। मतलब ये कि जिग्नेश मेवाणी, कन्हैया कुमार, शेहला रशीद और उमर खालिद को कन्नड़ की वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश ने गोद लिया था। पिछले साल पांच सितंबर 2017 को कुछ हिंदूवादी लोगों ने गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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