अफसरों ने जेल भूमि खरीद में सरकार को लगायी करोड़ों की चपत, तत्कालीन डीएम व एडीएम सिटी समेत आठ पर मुकदमा

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मुरादाबाद। जमीन घोटाले में फंसे तत्कालीन जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर व सेवानिवृत्त एडीएम सिटी अरुण कुमार श्रीवास्तव समेत आठ के खिलाफ बरेली विजिलेंस ने दो मुकदमे दर्ज कराए हैं। सिविल लाइन थाने में दर्ज मुकदमा सीलिंग जमीन घोटाला एवं मूंढापांडे थाने में दर्ज मुकदमा जेल की जमीन में हुए घोटाले का है। विजिलेंस जांच में जेल भूमि खरीद घोटाले का कच्चा चिट्ठा सामने आ गया है। प्रस्तावित जेल के लिए जिला प्रशासन ने जो भूमि खरीदी वह 20 दिन के भीतर दो बार बिकी थी।

जेल के लिए चिन्हित होने से पहले यह भूमि किसानों के नाम पर थी। इस भूमि पर जेल का प्रस्ताव स्वीकृत होते ही अफसरों ने पूरी भूमि अपने करीबियों को खरीदवा दी। हाकिमों ने बाद में इन लोगों को चार गुना कीमत चुकाकर यह भूमि सरकार के पक्ष में खरीद ली। इस खरीद – फरोख्त में सरकार को करीब पांच करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

विजिलेंस जांच में साबित हो चुका है कि तत्कालीन हलका लेखपाल से लेकर जिले में उस समय तैनात रहे डीएम तक इस खेल में शामिल थे। सभी ने अपने पदों का दुरुपयोग कर सरकार को आर्थिक क्षति पहुंचाई और परोक्ष रूप से आर्थिक लाभ लिए। सरकार के पक्ष में जब भूमि खरीद शुरू होने वाली थी उससे पहले ही इस सूचना को अपने करीबियों से साझा करके उन्हें सर्किल रेट पर भूमि खरीदवा दी।

नियमानुसार एक बार सरकारी योजना के लिए चिन्हित हो जाने के बाद इस भूमि की खरीद – फरोख्त पर रोक लग जानी चाहिए थी। लेकिन अफसरों ने ऐसा नहीं किया। जेल के लिए चिन्हित होने ही इस भूमि को तेजी से खरीदा – बेचा गया। जब भूमि किसानों के हाथों से निकलकर अफसरों के करीबियों के नाम पर दर्ज हो गई तब जिला प्रशासन ने इसकी खरीद शुरू की।

राज्यपाल के पक्ष में सर्किल रेट का चार गुना दाम चुकाकर भूमि खरीदी गई। किसानों के भूमि खरीदने वाले अफसरों के करीबी व्यापारियों और कुछ नेताओं को 20 दिन के भीतर ही करोड़ों रुपये का मुनाफा हुआ। विजिलेंस ने जांच रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को क्षति पहुंचाकर कमाए गए इस मुनाफे की बाद में अफसरों में भी बंदरबांट हुई।

जेल के लिए जिन किसानों की भूमि खरीदी गई उन्हें सरकार की योजना का कोई लाभ नहीं मिला। चार गुना कीमत पर किसानों का हक था, लेकिन अफसरों की मिलीभगत ने उनके इस हक पर डाका डलवा दिया। यदि यह भूमि सीधे किसानों से खरीदी जाती तो किसानों को चार गुना कीमत मिलती। अफसरों के इस खेल से किसानों में भी गुस्सा है।

एक निर्यातक ने भी जेल प्रोजेक्ट के लिए तीन एकड़ से अधिक भूमि सरकार को बेची। बेचने से कुछ दिन पहले ही यह भूमि खरीदी गई थी। निर्यातक का नाम अभी तक जांच के दायरे से बाहर है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह का कहना है कि निर्यातक ने खुद के हिस्से भी ज्यादा का बैनामा सरकार के पक्ष में कर ज्यादा रकम भी ले ली है। इस रकम को वापस करने के लिए निर्यातक को नोटिस जारी किया गया है।

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