तनुकु का TDR बॉन्ड घोटाला: बेगुनाहों पर कहर

ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट (TDR) बॉन्ड्स को लेकर आंध्र प्रदेश के तनुकु नगर पालिका में बड़ा विवाद छिड़ गया है। 2021-22 में जारी किए गए कुछ TDR बॉन्ड्स को राज्य सरकार ने नियमों का उल्लंघन करते हुए जारी करने के आरोप में रद्द कर दिया है, जिससे इन बॉन्ड्स के वास्तविक खरीदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह मामला केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की पारदर्शिता और भरोसेमंद प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। इस लेख में हम इस पूरे विवाद को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे।

तनुकु TDR बॉन्ड घोटाला: पीड़ितों की व्यथा

बेगुनाह खरीदारों पर गिरा कहर

तनुकु TDR बॉन्ड पीड़ित संघ के सदस्यों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी पीड़ा बयां की। उन्होंने बताया कि वे इन बॉन्ड्स को आंध्र प्रदेश डेवलपमेंट परमिशन मैनेजमेंट सिस्टम (APDPMS) पोर्टल से खरीदा था, जो राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि केवल वैध TDR बॉन्ड ही जनता के उपयोग के लिए उपलब्ध हों। 800 से ज़्यादा बिल्डर्स और व्यक्तियों ने पूरे राज्य में ये बॉन्ड्स खरीदे हैं और अब सभी को परियोजनाओं को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छोटे बिल्डर्स के लिए अतिरिक्त राशि का निवेश कर नए बॉन्ड खरीदना संभव नहीं है। यह घटना राज्य सरकार के प्रति लोगों के विश्वास को कमज़ोर करती है और एक खराब प्रशासन का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

नुकसान का आकलन और भविष्य की चुनौतियाँ

सरकार द्वारा TDR को रद्द करने से बिल्डर्स को निर्माण कार्य अधूरे छोड़ने और संपत्तियां बेचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। यह सिर्फ़ बिल्डर्स को ही नहीं बल्कि अन्य संबंधित उद्योगों और अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा रहा है। इस मामले से यह भी सवाल उठता है कि भविष्य में लोग TDR बॉन्ड में कैसे विश्वास रख सकेंगे यदि सरकार खुद द्वारा जारी किए गए बॉन्ड ही रद्द कर देती है? सरकार को न केवल पीड़ितों को मुआवज़ा देना चाहिए बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी कठोर कदम उठाने चाहिए।

जांच रिपोर्ट और सरकारी कार्रवाई

अनियमितताओं का खुलासा

आंध्र प्रदेश नगर और ग्राम नियोजन विभाग ने विजयवाड़ा नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त स्वप्निल दिनकर पुंडकर की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर तनुकु नगर पालिका में अनियमित रूप से जारी किए गए 29 TDR को रद्द कर दिया। इस समिति का गठन उच्च न्यायालय के आदेश के बाद किया गया था जो पीड़ितों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनाया गया था। रिपोर्ट में पाया गया कि मूल भूमि मालिकों ने कृषि भूमि को विकसित निर्मित क्षेत्र के रूप में दिखाया और गलत तरीके से बॉन्ड का मूल्य बढ़ाया। यह पाया गया की तत्कालीन नगर आयुक्त ने बॉन्ड का अनुपात भी नियमों के विपरीत दिया। ये सब अनियमितताएं सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और लापरवाही का सबूत है।

सरकारी रवैया और सुधारात्मक कदम

शहर और ग्राम नियोजन निदेशक रावुरी विद्यालता ने कहा कि खरीदार अपने बॉन्ड वापस ले सकते हैं और नए TDR के लिए आवेदन कर सकते हैं। वह इस मामले में समाधान के लिए इंतजार भी कर सकते हैं। तनुकु नगर पालिका के आयुक्त ने कहा कि वे कृषि भूमि की कीमतों के अनुसार TDR का मूल्य निर्धारित करेंगे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) इस मामले की जांच कर रहा है। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने में मदद मिल सकती है लेकिन साथ ही सरकार को पीड़ितों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को भी समझना चाहिए।

पीड़ितों की मांग और समाधान की राह

सरकार से न्याय की अपील

पीड़ितों ने मांग की है कि सरकार उन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे जिन्होंने अनियमितताएँ की हैं, न कि बेगुनाह खरीदारों को सज़ा दी जाए। वे सरकार से न्याय की अपील कर रहे हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए और एक ऐसा समाधान ढूँढ़ना चाहिए जिससे पीड़ितों को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सरकार को इस घोटाले के पीछे के लोगों को पकड़ने और सजा दिलाने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति दिखानी होगी।

सुझाव और सुधार

इस घटना ने सरकार की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया है। सरकार को TDR जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना होगा ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताएँ न हों। एक सुदृढ़ निगरानी प्रणाली स्थापित करने और ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की ज़रूरत है। इसके साथ ही पीड़ितों के आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए भी उपाय करने चाहिए।

टाके अवे पॉइंट्स:

  • तनुकु TDR बॉन्ड घोटाले से सैकड़ों निर्दोष खरीदार प्रभावित हुए हैं।
  • राज्य सरकार ने अनियमितताओं का पता लगाने के बाद बॉन्ड रद्द कर दिए हैं।
  • सरकार को पीड़ितों को मुआवज़ा देना चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने चाहिए।
  • TDR जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व लाने की ज़रूरत है।
  • भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इस मामले की जांच कर रहा है।

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