शंभू बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन: दिल्ली कूच की तैयारी, 101 किसानों का जत्था रवाना
भारत के किसानों का संघर्ष जारी है! शंभू बॉर्डर पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है क्योंकि 101 किसान दिल्ली की ओर कूच करने वाले हैं। यह आंदोलन सरकार के खिलाफ किसानों की बढ़ती उदासीनता और उनकी लंबे समय से लंबित मांगों को दर्शाता है। क्या यह आंदोलन एक नए युग का आगाज़ करेगा? क्या सरकार आखिरकार किसानों की सुनने वाली है? आइए जानते हैं इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में विस्तार से।
किसानों का दिल्ली कूच: एक नया अध्याय
आज, शंभू बॉर्डर पर 101 किसानों का जत्था दोपहर 12 बजे दिल्ली कूच करने के लिए तैयार है। इस कदम से दिल्ली में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल और भी तनावपूर्ण हो सकता है। यह कदम किसानों की निराशा और सरकार के प्रति उनके बढ़ते गुस्से का प्रतीक है। किसानों की प्रमुख मांगों में से एक है न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का गारंटी अधिनियम बनाया जाना, ताकि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिल सके।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल 26 नवंबर से अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर हैं। उनके अनशन को अब 19 दिन हो चुके हैं और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। किसानों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। इस अनशन को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने भी समर्थन दिया है, जो इस आंदोलन को एक व्यापक रूप दे रहा है।
सरकार पर किसानों का आरोप
किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार उनकी मांगों को अनसुना कर रही है और बातचीत करने से इनकार कर रही है। उन्होंने भाजपा सांसद रामचन्द्र जांगड़ा के किसानों के खिलाफ दिए गए विवादास्पद बयान की भी निंदा की है और मांग की है कि उनके बयान के लिए उनसे माफी मांगी जाए और उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाए। किसानों का कहना है कि सरकार का पुलिस-प्रशासन उनके साथ है और वह अपनी जाँच क्यों नहीं करा रही है।
किसानों की 12 प्रमुख मांगें: संक्षिप्त विवरण
किसानों ने अपनी 12 प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखी हैं जिनमे सभी फसलों के लिए MSP गारंटी अधिनियम, ऋण माफी, लखीमपुर खीरी हत्याकांड में न्याय, पिछले आंदोलनों से जुड़ी मांगों का निपटारा, बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करना, कृषि क्षेत्र को प्रदूषण कानून से बाहर रखना, भारत को WTO से बाहर आना, किसानों के लिए पेंशन योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को प्रभावी ढंग से लागू करना, मनरेगा में सुधार, और श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि शामिल हैं। ये मांगें किसानों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार करने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या होगा प्रभाव?
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को बातचीत करने और बल प्रयोग न करने का आदेश दिया है। अब यह देखना होगा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कितनी ईमानदारी से करेगी। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का मानना है कि सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के दबाव का क्या प्रभाव पड़ेगा यह देखना अभी बाकी है।
टेक अवे पॉइंट्स:
- 101 किसानों का दिल्ली कूच।
- जगजीत सिंह डल्लेवाल का जारी आमरण अनशन।
- सरकार पर किसानों का आरोप और उनकी प्रमुख मांगें।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और उसका संभावित प्रभाव।
यह संघर्ष जारी है, और इसका परिणाम भारत के लाखों किसानों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालेगा। आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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