सेना में नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाला गिरोह भंडाफोड़!
क्या आप भी सेना में नौकरी पाने का सपना देख रहे हैं? लेकिन सावधान हो जाइए, क्योंकि ठग भी इस सपने का फायदा उठाकर आपको ठगने की कोशिश कर सकते हैं! हाल ही में उत्तर प्रदेश STF ने एक ऐसे ही गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करता था। इस गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार कर लिया गया है, और अब इस पूरे मामले से जुड़ी पूरी कहानी जानने के लिए पढ़ते रहिए।
गिरोह का भंडाफोड़: सेना में नौकरी का झांसा
उत्तर प्रदेश STF और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने मिलकर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। उन्होंने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो भारतीय सेना में अस्थायी पदों पर भर्ती कराने का झांसा देकर लोगों से ठगी करता था। इस गिरोह का सरगना धीरेंद्र उर्फ मनोज, जो खुद आगरा के कैंटीन स्टोर डिपो में एक अस्थायी कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम करता था, को 2 दिसंबर को आगरा के मधुनगर चौराहा से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गिरोह का यह काम कई महीनों से चल रहा था, और इससे कई लोगों को नुकसान हुआ है। गिरफ्तारी के दौरान, पुलिस को आरोपी के पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं, जिनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, एटीएम कार्ड और बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़े कागजात, दो मोबाइल फोन, एक मोटरसाइकिल और 600 रुपये नकदी शामिल हैं।
गिरफ्तारी की कहानी: कैसे हुआ खुलासा?
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब इटावा के रहने वाले अनिल यादव ने मिलिट्री इंटेलिजेंस में शिकायत दर्ज कराई। अनिल यादव ने बताया कि कैसे मनीष भदौरिया और जसकरन पठानिया नाम के दो आर्मी हवलदारों ने धीरेंद्र उर्फ मनोज के जरिए आगरा के कैंटीन स्टोर डिपो में अस्थायी पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम ऐंठी। उन्हें भारी रकम देने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। जांच के बाद पता चला कि मनीष भदौरिया ने दिल्ली में सेना के अधिकारियों से मिलकर सेटिंग करने का दावा किया था और फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों को भारी रकम का भुगतान करने के लिए बहलाया।
धीरेंद्र उर्फ मनोज की भूमिका: कैसे करता था ठगी?
धीरेंद्र उर्फ मनोज की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में पता चला कि वह आगरा के कैंटीन स्टोर डिपो में अस्थायी कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम करता था और मनीष भदौरिया और जसकरन पठानिया के साथ मिलकर यह ठगी का धंधा चलाता था। यह गिरोह लोगों को व्हाट्सऐप पर फर्जी दस्तावेज़ भेजकर नौकरी का झांसा देता था और उनसे पैसे ऐंठता था। इस तरह, धीरेंद्र उर्फ मनोज एक महत्वपूर्ण कड़ी था इस ठगी के गिरोह में।
फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल: ठगी का तरीका
इस गिरोह ने लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर, बैंक खातों में पैसे जमा करवाकर, और ऑनलाइन माध्यमों से भी ठगी को अंजाम दिया। उन्होंने अपने शिकार को विश्वास में लेने के लिए झूठे वादे किए और उन्हें मोटी रकम चुकाने के लिए मजबूर किया। इस तरह सेना में नौकरी पाने की उम्मीद रखने वाले बेरोज़गार युवक और युवतियों का शोषण किया गया।
कानूनी कार्रवाई: गिरफ्तारी और आगे की प्रक्रिया
धीरेंद्र उर्फ मनोज के खिलाफ थाना सदर बाजार आगरा में एफआईआर संख्या 687/2024 धारा 318(4)/61(02) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। एसटीएफ और मिलिट्री इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई से इस ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है और अब मामले की जांच जारी है। आगे की कानूनी प्रक्रिया स्थानीय पुलिस द्वारा किए जाएगी। इससे अन्य लोगों की सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा और इस तरह की ठगी से बचा जा सकेगा।
भविष्य के लिए सावधानियां: सेना की नौकरी पाने के टिप्स
अगर आपको भी सेना में नौकरी मिलने का प्रस्ताव दिया जाता है, तो ध्यान रखें कि सेना न कभी भर्ती के लिए पैसे नहीं मांगती। इस तरह के किसी भी संदेहास्पद प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले सतर्क रहें और अधिकृत अधिकारियों से संपर्क करके पुष्टि जरूर करें। धोखाधड़ी और ठगी से बचने के लिए सतर्क रहना बहुत ही महत्वपूर्ण है।
Take Away Points
- सेना में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़
- धीरेंद्र उर्फ मनोज सहित गिरोह के सदस्य गिरफ्तार
- फर्जी दस्तावेज़ों और व्हाट्सऐप के ज़रिए लोगों से की जाती थी ठगी
- आगे की कानूनी कार्रवाई जारी
- सेना की नौकरी के लिए आवेदन करते समय सतर्क रहें और किसी भी संदेहास्पद प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करें।

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