संभल हिंसा: सोहेल इकबाल का दावा- मैं बेक़सूर हूँ, घर के अंदर ही था
संभल में हुई हिंसा ने पूरे उत्तर प्रदेश को हिला कर रख दिया है। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई और कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस मामले में सपा विधायक इकबाल मलिक के बेटे सोहेल इकबाल पर भी एफआईआर दर्ज की गई है। सोहेल ने आजतक से बात करते हुए कहा है कि वह इस हिंसा में किसी भी तरह से शामिल नहीं थे और वह घर के अंदर ही थे। उन्होंने पुलिस को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके खिलाफ कोई सबूत है तो उसे पेश किया जाए।
क्या है पूरा मामला?
जिला अदालत के आदेश के बाद संभल की शाही जामा मस्जिद के अंदर सर्वे का काम चल रहा था। सर्वे के दौरान ही अचानक भारी संख्या में लोग मस्जिद के बाहर इकट्ठा हो गए और नारेबाजी करने लगे। इसके बाद पुलिस की टीम पर पथराव शुरू कर वाहनों में आग लगा दी गई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया।
सोहेल इकबाल का बयान
सोहेल इकबाल ने दावा किया है कि उनके पिता ने उन्हें फोन करके बताया था कि कल सर्वे टीम आ रही है। उन्होंने कहा कि वह सुनिश्चित करने के लिए गए थे कि सर्वे टीम को कोई परेशानी न हो और शांति भंग न हो। उन्होंने कहा कि जब हिंसा हुई, तब वह घर के अंदर ही थे और उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने का आग्रह किया था।
सपा विधायक इकबाल मलिक का बयान
सपा विधायक इकबाल मलिक ने कहा है कि उन्हें शाम को पता चला कि अगली सुबह सर्वे होने वाला है। उन्होंने अपने बेटे से कहा कि वह सुनिश्चित करे कि शांति भंग न हो। उन्होंने कहा कि उनका बेटा इस घटना में किसी भी तरह से शामिल नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि सर्वे करने की इतनी जल्दी क्या थी।
पुलिस की कार्रवाई
संभल हिंसा के मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। संभल हिंसा मामले में अब तक 2750 अज्ञात और कुछ नामजद लोगों के खिलाफ कुल 7 FIR दर्ज हुई है। इस हिंसा में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4 बड़े अधिकारियों समेत 24 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और स्थानीय विधायक के बेटे सोहेल इकबाल के खिलाफ भी केस दर्ज किया है।
संभल हिंसा: क्या थी वजह और क्या है आगे?
संभल में हुई हिंसा की कई वजहें बताई जा रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सर्वे करने की जल्दबाजी के चलते यह हिंसा हुई। कुछ का मानना है कि इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित किया गया था। इस हिंसा के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्या थे इसके पीछे के कारण और आगे क्या होने वाला है। क्या पुलिस इस मामले में सभी दोषियों को पकड़ पाएगी? आगे के दिनों में भी हिंसा होने का डर बना हुआ है या नहीं?
जामा मस्जिद सर्वे की पृष्ठभूमि
जामा मस्जिद के अंदर सर्वे करने की वजह भी विवादों में घिरी हुई है। इस सर्वे के विरोध में काफी विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। क्या यह सर्वे कानूनी तौर पर सही था? क्या ऐसे सर्वे से सांप्रदायिक तनाव पैदा नहीं हो सकता था? इन सवालों के जवाब की तलाश बेहद ज़रूरी है।
राजनीतिक कोण
संभल हिंसा में राजनीति की भूमिका पर भी कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि हिंसा को राजनीतिक फायदे के लिए भड़काया गया। क्या ऐसा सच में हुआ था? इसकी जाँच की जानी चाहिए।
हिंसा से सबक
संभल हिंसा से हमें कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं। सबसे अहम यह कि सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। किसी भी तरह के सर्वे या निर्माण के दौरान सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी है, ताकि हिंसा भड़कने से रोका जा सके। सरकारों को भी चाहिए कि वे ऐसे मामलों में सख्ती से पेश आएँ और साम्प्रदायिक तनाव फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।
संभल हिंसा: आगे का रास्ता
इस हिंसा से पीड़ित परिवारों को सरकार से पूरा समर्थन मिलना चाहिए। साथ ही ऐसे क़दम उठाए जाने चाहिए जिनसे भविष्य में इस तरह की हिंसा को रोका जा सके। सांप्रदायिक एकता के लिए काम करने वाली संस्थाओं और लोगों को भी इसमें आगे आना चाहिए।
Take Away Points
- संभल हिंसा एक भयावह घटना है जिसमें कई लोग मारे गए और कई घायल हुए।
- सोहेल इकबाल ने दावा किया है कि वह इस हिंसा में शामिल नहीं थे।
- पुलिस ने इस मामले में कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
- इस हिंसा से साम्प्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
- सरकार और समाज को मिलकर इस तरह की हिंसा को रोकने के लिए काम करना चाहिए।

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