संभल जामा मस्जिद सर्वे हिंसा: वीडियो वायरल, पुलिस की सफाई और राजनीतिक आरोपों का खेल
क्या आप जानते हैं कि संभल की जामा मस्जिद में हुए सर्वे के दौरान हुई हिंसा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया? एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ जिसने सबको हैरान कर दिया। इस वीडियो में साफ-साफ दिख रहा था कि पुलिस भीड़ पर गोली चला रही है और अधिकारी कह रहे थे- “गोली चलाओ, गोली चलाओ!” क्या सच में पुलिस ने गोली चलाई थी या ये सिर्फ़ डराने की कोशिश थी? आइये जानते हैं इस पूरे मामले की सच्चाई और इसमें शामिल राजनीतिक आरोपों के बारे में।
वीडियो में क्या दिख रहा है?
वायरल वीडियो में पुलिस अधिकारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गोली चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं और साथ ही ‘गोली चलाओ-गोली चलाओ’ जैसे शब्द भी साफ सुने जा सकते हैं. इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी है और इस घटना की निंदा की जा रही है।
पुलिस कमिश्नर का बयान
मुरादाबाद रेंज के कमिश्नर, आंजनेय कुमार, ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई पेश की है. उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य भीड़ पर गोली चलाना नहीं बल्कि उसे डराना था। उनका कहना था कि यह सिर्फ़ भीड़ को काबू में करने की एक रणनीति थी. उन्होंने समाज विरोधी लोगों की पहचान करने और साजिश में शामिल लोगों को बेनकाब करने की बात कही है. हालांकि, उनके इस बयान ने विवादों में और इज़ाफ़ा कर दिया है.
सपा सांसद और विधायक के बेटे पर FIR क्यों?
हिंसा के सिलसिले में संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और स्थानीय विधायक के बेटे पर FIR दर्ज की गई है. कमिश्नर ने बताया कि यह FIR 19 तारीख को हुई उनकी गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए दर्ज की गई है. पुलिस ने लोगों से पूछताछ के बाद ये कार्रवाई की है. अब देखना होगा कि पुलिस इन आरोपों को कैसे साबित करती है।
राजनीतिक रंगत
इस पूरे मामले में राजनीति का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा है. विपक्षी दलों ने इस घटना पर सरकार को निशाने पर लिया है, जबकि सरकार का दावा है कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। क्या यह सिर्फ़ एक धार्मिक विवाद है या इसके पीछे कुछ और राजनीतिक चाल है, यह अभी साफ़ नहीं है.
संभल हिंसा: मजिस्ट्रियल जांच और पुलिस कार्रवाई
संभल हिंसा मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी हो गए हैं, साथ ही पुलिस की कार्रवाई भी जारी है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने 100 से ज़्यादा पत्थरबाजों की पहचान की है और अब तक 27 लोगों को गिरफ़्तार किया है, जिसमें दो महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में 12 FIR दर्ज की हैं। 14 साल से लेकर 72 साल तक के लोगों पर गंभीर धाराओं में आरोप लगाए गए हैं. इसमें सांसद जियाउर्रहमान बर्क और विधायक के बेटे पर भी लोगों को भड़काने का आरोप लगाया गया है.
गिरफ्तारियों का सिलसिला
पुलिस ने सीसीटीवी फ़ुटेज के आधार पर उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की हैं और उनके पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगाए हैं। साथ ही नुकसान की वसूली और उपद्रवियों पर इनाम की भी बात कही जा रही है।
जामा मस्जिद सर्वे और इसके बाद हुई हिंसा: क्या है पूरा मामला?
यह घटना शाही जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हुई थी. सर्वे के बाद क्या हुआ, ये तो सभी जानते हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर सर्वे क्यों किया जा रहा था? किस कारण से लोगों में इतना गुस्सा था? और क्या इसके पीछे की कोई और वजह है? यह सब जानने के लिए ज़रूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच की जाए।
आगे क्या?
इस घटना के बाद सवाल यह है कि क्या ऐसे मामले दोबारा से नहीं होंगे? सरकार को इस घटना से सबक लेते हुए कड़े कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे विवाद और हिंसा को रोका जा सके। साथ ही यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि ऐसे मामलों में राजनीति का दखल नहीं होना चाहिए।
Take Away Points:
- संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की हिंसा की जाँच होनी चाहिए
- वायरल वीडियो पर पुलिस ने सफाई दी है
- सांसद और विधायक के बेटे पर भी एफआईआर दर्ज हुई है
- मजिस्ट्रियल जांच और पुलिस कार्रवाई जारी है
- उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की गई हैं और इनाम की घोषणा हो सकती है

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