संसद में सीटिंग अरेंजमेंट की राजनीति: अखिलेश यादव का विरोध और विपक्ष में दरार!
क्या आप जानते हैं कि लोकसभा में सांसदों की बैठने की व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विवाद चल रहा है? जी हाँ, हाल ही में हुए सीटिंग अरेंजमेंट में बदलाव के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव नाराज़ हैं और उन्होंने कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। इस विवाद से विपक्षी एकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या सच में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में दरार आ रही है या ये सिर्फ़ सीटों का मामला है? आइये जानते हैं इस राजनीतिक ड्रामे के पीछे की पूरी सच्चाई।
लोकसभा सीटिंग अरेंजमेंट: एक नज़र
संसद में सीटें कैसे तय होती हैं? कौन-कौन से नियम हैं? क्या आप जानते हैं कि नियमों के मुताबिक पार्टी के सांसदों की संख्या के आधार पर सीटें दी जाती हैं? जैसे, सपा के 37 सांसद होने पर उन्हें फॉर्मूला के हिसाब से आगे केवल 1 सीट मिलती है। लेकिन यही फॉर्मूला इस विवाद का मूल कारण बना। अखिलेश यादव को पहले आठवें ब्लॉक में राहुल गांधी के बगल में सीट थी, अब उन्हें छठे ब्लॉक में सीट आवंटित हुई है। यह बदलाव अखिलेश यादव सहित कई नेताओं को पसंद नहीं आया।
अखिलेश यादव की नाराज़गी: सपा का आरोप और कांग्रेस की चुप्पी
अखिलेश यादव ने कहा कि ये बदलाव जानबूझकर बीजेपी ने करवाया ताकि इंडिया गठबंधन को कमज़ोर किया जा सके। उन्होंने कांग्रेस पर सवाल उठाया कि उन्होंने इस बदलाव के खिलाफ आवाज़ क्यों नहीं उठाई? उनका कहना है कि अगर कांग्रेस ने उनकी पार्टी के लिए और सीटों की मांग की होती तो ये मसला इतना बड़ा नहीं बनता।
सपा सांसदों की अलग रणनीति: एकता पर सवाल
इस पूरे विवाद के बीच सदन की कार्यवाही के दौरान सपा सांसदों का अलग से रहना भी चर्चा का विषय है। नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों में सपा सांसदों की गैरमौजूदगी पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जो गठबंधन की एकता को लेकर चिंता जता रहे हैं।
विवाद का मूल: सीटों का गणित और राजनीतिक खेल
यह मात्र सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि राजनीतिक दबदबे का खेल है। पहली पंक्ति में बैठना गरिमा का प्रतीक है, और अखिलेश यादव को दूसरी पंक्ति में जाने का मतलब उनका प्रभाव कमजोर होना बताया जा रहा है। इंडिया ब्लॉक में सबसे मज़बूत पार्टी होने के बावजूद, कांग्रेस को सहयोगी दलों के बीच सीट आवंटन की जिम्मेदारी दी गयी थी। और अब अखिलेश यादव इस आवंटन को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
सवालों की झड़ी: कौन है ज़िम्मेदार?
अखिलेश यादव की नाराज़गी के कई पहलू हैं। क्या वाकई कांग्रेस और सपा के बीच दूरियाँ बढ़ रही हैं? क्या ये सीटों के आवंटन से ज्यादा कुछ है? क्या ये विपक्षी एकता के लिए खतरा है? कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी गठबंधन को इस मामले पर सावधानी से काम करने की ज़रूरत है, ताकि उनकी एकता कमज़ोर न हो।
सीट आवंटन का प्रकरण: नियम और अपवाद
संसद के नियमों के अनुसार, स्पीकर संसद सदस्यों की बैठने की व्यवस्था को तय करते हैं। लोकसभा में बैठने की व्यवस्था के नियम बिल्कुल स्पष्ट नहीं हैं। पहले पार्टी के सांसदों की संख्या देखी जाती है, फिर क्षमता के अनुसार सीटें आवंटित की जाती हैं।
क्यों ज़रूरी है पहली पंक्ति?
पहली पंक्ति की सीटें बेहद अहम हैं। वहां बैठने का मतलब प्रमुखता, और प्रभाव है। अखिलेश यादव को पीछे की पंक्ति में शिफ्ट करना उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा सकता है। इसलिए ये बस सीटों का सवाल नहीं बल्कि, राजनीतिक सत्ता के बंटवारे का खेल बन गया है।
आगे क्या?
अखिलेश यादव ने स्पीकर से इस मामले में हस्तक्षेप की गुज़ारिश की है। इस मसले का हल स्पीकर पर ही निर्भर है, और यह देखना होगा कि आगे क्या होता है।
क्या एकता होगी बरक़रार?
अखिलेश की नाराज़गी इंडिया गठबंधन की एकता पर एक सवाल खड़ा करती है। आने वाले समय में इसका हल मिलना और दोनों दलों के बीच तालमेल बनाए रखना बहुत ज़रूरी है। अगर इंडिया गठबंधन का विपक्षी के तौर पर प्रभावी प्रदर्शन करना है तो ऐसी दरारों से उसे सावधान रहने की ज़रूरत है।
Take Away Points
- लोकसभा में सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव नाराज़ हैं।
- अखिलेश का आरोप है कि ये बदलाव बीजेपी द्वारा इंडिया गठबंधन को कमज़ोर करने के लिए किया गया है।
- इस मामले में स्पीकर से हस्तक्षेप की गुज़ारिश की गई है।
- इस घटनाक्रम से विपक्षी एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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