कुंदरकी का करिश्मा: 31 साल बाद बीजेपी ने कैसे जीता मुस्लिम बहुल सीट?

कुंदरकी का करिश्मा: कैसे बीजेपी ने 31 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा?

क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की कुंदरकी विधानसभा सीट पर बीजेपी ने इतिहास रच दिया है? 31 साल बाद, बीजेपी ने इस सीट पर फिर से परचम लहराया है! 60% से ज़्यादा मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह की जीत ने सभी को चौंका दिया है. आइए, जानते हैं इस हैरान करने वाली जीत के पीछे के राज़.

मुस्लिम बहुल सीट पर बीजेपी की जीत: एक नज़र

कुंदरकी सीट, मुरादाबाद में स्थित है, जहाँ मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी ज़्यादा है. यह सीट हमेशा से ही समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन इस बार परिणाम कुछ और ही रहा. रामवीर सिंह ने एक लाख 31 हज़ार से ज़्यादा वोटों से जीत हासिल की, जबकि सपा प्रत्याशी को केवल 20 हज़ार वोट मिले. इस शानदार जीत के पीछे क्या है? आइये जानते है

रामवीर सिंह की जीत: क्या है राज?

रामवीर सिंह की जीत के कई पहलू हैं, जिन पर गौर करना ज़रूरी है:

मुस्लिम टोपी और जनता का प्यार

कहा जा रहा है कि रामवीर सिंह द्वारा मुस्लिम टोपी पहनना उनकी जीत में अहम भूमिका निभा सकता है. उनके परिवार की मुस्लिम समुदाय के बीच पहले से ही अच्छी पकड़ रही है, लेकिन इससे पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं जब मुस्लिम समुदाय में लोकप्रिय व्यक्तियों को बीजेपी के टिकट पर चुनाव हार का सामना करना पड़ा है. इस बार, मुस्लिम समुदाय ने रामवीर सिंह को अपना भरपूर समर्थन दिया. लगभग 86 प्रतिशत वोट रामवीर सिंह को मिले.

दो बार रुपये से तौला गया सम्मान

यह भी कहा जा रहा है कि रामवीर सिंह को दो बार मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उनके वज़न के बराबर रुपये देकर सम्मानित किया था. यह दर्शाता है कि उनके काम और व्यवहार ने कितना प्रभाव डाला. स्थानीय लोगों का कहना है कि अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने भी बहुत मेहनत की, जिन्होंने मुस्लिम राजपूत होने के नाते ठाकुर रामवीर सिंह को अपना भाई बताकर मुस्लिम वोटों के बीच पैठ बनाई।

सपा का विरोध और बीजेपी का क़दम

कुछ लोग मानते हैं कि मुस्लिम बीजेपी कार्यकर्ता की मौत के बाद उसके परिवार के सामाजिक बहिष्कार और सपा नेताओं की धमकियों ने भी मुस्लिम समुदाय में नाराज़गी पैदा की. इसके साथ ही सपा प्रत्याशी के कुत्ते के पट्टे वाले बयान ने भी मुस्लिम और अन्य समुदाय के लोगों को नाराज किया।

सपा का ‘पट्टा’ वाला बयान

सपा प्रत्याशी द्वारा दिए गए कथित ‘कुत्ते के पट्टे’ वाले बयान ने रामवीर सिंह को चुनावी मुहिम में एक बड़ा हथियार दे दिया. रामवीर सिंह ने इस बयान को मुद्दा बनाकर मुस्लिम और यादव मतदाताओं तक पहुँचे.

क्या प्रशासन का रोल रहा?

सपा प्रत्याशी ने चुनाव के दिन ही कुंदरकी में पड़े वोटों के आधार पर फिर से चुनाव कराने की मांग की थी, आरोप लगाया था कि 250 से ज्यादा बूथों पर उनके एजेंट नहीं थे, वोटर लिस्ट से कई लोगों के नाम गायब थे. इसके साथ ही, पुलिस द्वारा वोटिंग में दखल देने के आरोप भी लगे थे. लेकिन, भाजपा ने इस पर अलग ही तर्क दिया।

कुंदरकी की जीत: क्या है सीख?

कुंदरकी की घटना भाजपा और सपा दोनों के लिए कई सीख लेकर आती है। कुंदरकी में हुई इस जीत से एक नया संदेश गया है।

Take Away Points

  • कुंदरकी में भाजपा की जीत कई कारकों का नतीजा है, जिसमें स्थानीय नेतृत्व की भूमिका, सामाजिक सद्भाव, और राजनीतिक रणनीतियाँ शामिल हैं.
  • यह चुनाव दर्शाता है कि धर्म और जाति से परे जाकर जनता के दिलों में जगह बनाने से ही सफलता मिलती है.
  • राजनीतिक पार्टियों को यह सीखना होगा कि जनता के बीच काम करना और उनकी बात सुनना कितना जरूरी है.

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