कानपुर में बेटी की गुमशुदगी: बुजुर्ग दंपति का आत्मदाह का प्रयास

कानपुर में बेटी की गुमशुदगी: बुजुर्ग दंपति ने आत्मदाह का किया प्रयास, पुलिस ने बचाया

क्या आप जानते हैं कि कानपुर में एक बुजुर्ग दंपति ने अपनी गुमशुदा बेटी को ढूंढने में पुलिस की कथित लापरवाही से इतना आहत हो गए कि उन्होंने आत्मदाह का प्रयास किया? यह सच है! इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। आइए, इस घटना के हर पहलू पर एक नजर डालते हैं जो बेटी की गुमशुदगी और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाता है।

घटना का विवरण

घटना कानपुर के बिल्हौर इलाके में हुई जहाँ राकेश दुबे और उनकी पत्नी ने अपनी 22 वर्षीय बेटी आकांक्षा दुबे की गुमशुदगी को लेकर पुलिस की निष्क्रियता से निराश होकर सीपी दफ्तर के बाहर आत्मदाह करने का प्रयास किया। आकांक्षा 31 अगस्त को शिवराजपुर के खरेश्वर मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद लापता हो गई थी। 105 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाने से दंपति पूरी तरह से निराश हो गए थे।

पुलिस की कथित लापरवाही

दंपति का आरोप है कि उन्होंने कई बार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और यहाँ तक कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय में भी आवेदन दिया, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। यह कथित पुलिस की लापरवाही बेटी की गुमशुदगी के मामले में एक बड़ा सवाल है। क्या पुलिस ने अपने कर्तव्य का पालन किया? क्या बेटी की गुमशुदगी के पीछे कोई साजिश है? क्या आकांक्षा की गुमशुदगी का पर्याप्त जाँच नहीं की गई? इन सभी प्रश्नों का उत्तर अब तक नहीं मिल पाया है और इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए हैं।

घटना के बाद की कार्रवाई

आत्मदाह के प्रयास के बाद, पुलिस आयुक्तालय ने तुरंत मामले की जाँच का आदेश दिया है। सहायक पुलिस आयुक्त (बिल्हौर) सुमित सुधाकर रामटेके को जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए, जांच अधिकारी और स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। इस घटना से पुलिस विभाग को अपनी कार्यप्रणाली पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित होना चाहिए।

भविष्य के लिए क्या उपाय?

इस घटना से कई महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं: क्या ऐसी प्रणाली मौजूद है जो यह सुनिश्चित करे की इस तरह की गुमशुदगी के मामले में पुलिस समय पर और प्रभावी ढंग से काम करें? क्या पुलिस अधिकारियों के लिए कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम है जो उन्हें इस तरह के संवेदनशील मामलों को संभालने के तरीके सिखाएं? क्या गुमशुदगी की घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस नीति और योजना लागू होनी चाहिए? यह जरूरी है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दुहराई न जाएं, और नागरिकों को अपनी चिंताओं के साथ सुनी जाए और उनके अधिकारों की रक्षा हो।

Take Away Points

  • कानपुर में बेटी की गुमशुदगी के मामले में पुलिस की कथित लापरवाही एक बड़ी समस्या है।
  • आत्मदाह का प्रयास करने वाले दंपति की कहानी दर्शाती है कि पुलिस में विश्वास की कमी है।
  • सरकार को इस मामले में पुलिस की भूमिका और कानून प्रवर्तन प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
  • नागरिकों को अपनी चिंताओं और सुरक्षा के बारे में अधिक मुखर होना चाहिए।

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