काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव मंदिर में अब नहीं काटा जाएगा केक! जानिए क्या है पूरा मामला
काशी के प्रसिद्ध बाबा काल भैरव मंदिर में हाल ही में एक विवाद हुआ है जिसके बाद मंदिर प्रबंधन ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब से मंदिर में केक काटने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं, मंदिर के गर्भगृह में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ और इस फैसले से जुड़ी पूरी जानकारी।
विवाद की शुरुआत
हाल ही में एक महिला मॉडल ने बाबा काल भैरव मंदिर के गर्भगृह में अपना जन्मदिन केक काटकर मनाया और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद मंदिर के पुजारियों और प्रबंधन पर पश्चिमी संस्कृति को बढ़ावा देने और सनातन परंपरा को ठेस पहुँचाने के आरोप लगे। इस घटना के बाद मंदिर के महंत परिवार ने एक आपात बैठक की और इस मामले पर विचार किया।
मंदिर प्रबंधन का बड़ा फैसला
मंदिर प्रबंधन के फैसले के अनुसार, अब मंदिर परिसर में कहीं भी केक काटना मना होगा। गर्भगृह में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस फैसले का काशी विद्वत परिषद ने समर्थन किया है। परिषद के महासचिव प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि कालभैरव मंदिर में केक काटने की घटना अक्षम्य है, लेकिन केक काटने की परंपरा पर रोक लगाने का फैसला सराहनीय है।
विशेष दर्शन और दक्षिणा
मंदिर प्रबंधन ने यह भी बताया कि विशेष दर्शन के लिए भक्तों से दक्षिणा ली जाती है क्योंकि इसमें काफी सामग्री का इस्तेमाल होता है। भविष्य में गर्भगृह में आने वाले भक्तों पर विशेष नजर रखी जाएगी।
अब क्या होगा?
अब मंदिर में विशेष उत्सवों पर लड्डू और प्रसाद का भोग लगाया जाएगा और भक्तों में वितरित किया जाएगा। मंदिर के पुजारी और प्रबंधन का मानना है कि यह निर्णय मंदिर की पवित्रता और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए आवश्यक था।
काल भैरव मंदिर: क्या है खास?
बाबा काल भैरव मंदिर, काशी के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर शहर के सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक को समर्पित है जिन्हें काशी का कोतवाल माना जाता है। इस मंदिर में भक्तों की अपार आस्था है और यह सदियों से हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों ही महत्व का केंद्र है।
बाबा काल भैरव की महिमा
बाबा काल भैरव को काशी के रक्षक देवता के रूप में माना जाता है और उन्हें न केवल शहर बल्कि सभी भक्तों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि बाबा काल भैरव के आशीर्वाद से काशी सुरक्षित और संपन्न रहती है।
मंदिर की वास्तुकला
काल भैरव मंदिर की वास्तुकला और भित्तिचित्र बहुत ही अद्भुत हैं, जो हिंदू धर्म और कला के एक अनोखे संगम को प्रदर्शित करते हैं।
मंदिर के फैसले पर क्या कहना है भक्तों का?
मंदिर के इस नए नियम के बारे में भक्तों के अलग-अलग विचार हैं। कुछ भक्तों ने इस फैसले का समर्थन किया है, तो वहीं कुछ भक्तों को यह फैसला पसंद नहीं आया है। कुछ का कहना है कि केक काटना एक पश्चिमी संस्कृति है जिसका मंदिर जैसे पवित्र स्थान में कोई स्थान नहीं है। कुछ भक्तों ने निराशा जाहिर की है क्योंकि उन्हें जन्मदिन या अन्य विशेष अवसरों पर केक काटने की परंपरा पसंद थी। कई लोगों ने मंदिर के इस फैसले पर सोशल मीडिया में अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं।
विवादों से उपजे निष्कर्ष
इस घटना के बाद, स्पष्ट हो गया है कि सभी को धर्म और परंपरा का आदर करना चाहिए और धार्मिक स्थानों की पवित्रता को बनाए रखना जरूरी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद मंदिर प्रबंधन ने कड़े कदम उठाने पड़े जिससे आगामी दिनों में ऐसी घटनाएँ न हो।
टेक अवे पॉइंट्स
- काशी के बाबा काल भैरव मंदिर में अब केक काटना प्रतिबंधित है।
- गर्भगृह में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
- यह फैसला एक विवाद के बाद लिया गया है जिसमे एक महिला मॉडल ने गर्भगृह में केक काटा था और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ था।
- मंदिर प्रबंधन ने भक्तों की आस्था और मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया है।
- इस निर्णय पर भक्तों के अलग-अलग विचार हैं।

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