दिल्ली प्रदूषण: निर्माण मजदूरों पर संकट

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण ने निर्माण मज़दूरों की ज़िंदगी में डाला है संकट!

दिल्ली की हवा में जहर घुला हुआ है और इस जहर की मार सबसे ज़्यादा झेल रहे हैं निर्माण मज़दूर। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के चलते सरकार ने सख्त पाबंदियां लगाई हैं, जिससे इन मज़दूरों का रोज़गार छिनता जा रहा है और उनके परिवार भूखे मरने की कगार पर हैं। क्या आप जानते हैं कि इन मज़दूरों की क्या कहानी है? आइए, जानते हैं इनकी पीड़ा को…

प्रदूषण का कहर: रोज़ी-रोटी छिन गई

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना ज़्यादा बढ़ गया है कि AQI 450 से भी ऊपर पहुँच गया है। इसके चलते सरकार ने GRAP-IV लागू किया है जिसके तहत निर्माण कार्य रोक दिए गए हैं। इसका सीधा असर दिहाड़ी मज़दूरों पर पड़ रहा है जिनकी रोज़ी-रोटी एक दिन की कमाई पर निर्भर करती है। सुमन, दो बच्चों की माँ, बताती हैं, “अगर काम नहीं होगा तो हम क्या खाएँगे? बच्चों को क्या खिलाएँगे?” उनके जैसे हज़ारों मज़दूर हैं जिनकी यही चिंता सता रही है।

सरकारी योजनाएँ: सिर्फ़ नाम के लिए?

सुमन ने हाल ही में अपना श्रमिक कार्ड रिन्यू करवाया था, उम्मीद थी कि उन्हें सरकारी सहायता मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनकी तरह कई मज़दूरों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार इतना है कि असली मदद तक पहुँच ही नहीं पाती।

दिल्ली की हवा में जहर: मज़दूरों का संकट

दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। हालात इतने ख़राब हैं कि स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं, ऑफिसों को वर्क फ्रॉम होम के निर्देश देने पड़ रहे हैं, और निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। AQI लगातार 400 के पार बना हुआ है, जिससे लोगों का साँस लेना भी मुश्किल हो गया है।

सरकार की पाबंदियाँ: क्या है समाधान?

सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए कई पाबंदियाँ लगाई हैं, लेकिन इनका सबसे ज़्यादा असर ग़रीब मज़दूरों पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि पाबंदियाँ ज़रूरी हैं, लेकिन सरकार को उनके पुनर्वास की भी व्यवस्था करनी चाहिए ताकि वे और उनके परिवार भूखे न मरें।

उम्मीद की किरण: क्या है रास्ता?

63 वर्षीय बाबू राम, एक निर्माण मज़दूर, कहते हैं, “हमारे पास कोई पेंशन नहीं है, कर्ज़ के बोझ तले दबे हुए हैं और काम नहीं मिलेगा तो परिवार कैसे चलेगा?” 42 वर्षीय राजेश कुमार, जिनका परिवार बिहार में उन पर निर्भर है, का कहना है कि वे कर्ज़ चुकाने में भी जूझ रहे हैं।

क्या है समाधान?

इन मज़दूरों की समस्या का समाधान सरकार के तत्काल हस्तक्षेप से ही निकल सकता है। सरकार को चाहिए कि वह इन मज़दूरों को काम या फिर आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाए ताकि वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कर सकें। साथ ही भ्रष्टाचार को ख़त्म करके सरकारी योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की ज़रूरत है।

Take Away Points

  • दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का बढ़ता स्तर निर्माण मज़दूरों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है।
  • सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों से मज़दूरों की रोज़ी-रोटी छिन रही है।
  • सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ मज़दूरों तक नहीं पहुँच पा रहा है।
  • सरकार को चाहिए कि वह इन मज़दूरों के पुनर्वास के लिए कदम उठाए।

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