दिल्ली शराब नीति घोटाला: केजरीवाल ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका, ED को नोटिस जारी
दिल्ली की राजनीति में भूचाल ला देने वाला शराब घोटाला, जिसने आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की छवि पर गहरा धब्बा लगाया है, एक बार फिर सुर्खियों में है! पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में अपने ऊपर चल रही जाँच पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है. इस ख़बर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. क्या केजरीवाल को हाईकोर्ट से राहत मिलेगी? आइये जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी!
केजरीवाल की याचिका और ED का नोटिस
केजरीवाल की याचिका में ED (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा की जा रही कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई है. उन्होंने अपनी दलील में कहा है कि उनके खिलाफ दायर की गई छठी और सातवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कोई नई जानकारी नहीं है, और गवाहों के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं. याचिका में, केजरीवाल के वकील ने यह भी सवाल उठाया है कि बिना धारा के ट्रायल कोर्ट इस मामले में सुनवाई कैसे कर सकती है. यह याचिका बेहद अहम है क्योंकि इसके नतीजे केजरीवाल के भविष्य पर सीधा प्रभाव डाल सकते हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ED को नोटिस जारी किया है, और जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ED की तरफ़ से कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए समय माँगा है. यह मामला बेहद नाज़ुक मोड़ पर है और इसका आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा.
क्या है दिल्ली शराब नीति घोटाला और क्यों है ये इतना विवादास्पद?
दिल्ली की शराब नीति, जिसका उद्देश्य था ‘माफिया राज’ का अंत करना, एक बड़े विवाद में बदल गई. यह नीति नवंबर 2021 में लागू हुई और इसके तहत शराब कारोबार पूरी तरह से निजी हाथों में दे दिया गया. सरकार का दावा था कि इससे राजस्व में वृद्धि होगी और शराब माफियाओं पर लगाम लगेगी, लेकिन कुछ ही समय में, कई गड़बड़ियों का खुलासा हुआ.
नीति का विवादित पहलू और रद्द होना
इस शराब नीति में कई कथित अनियमितताओं के आरोप लगने शुरू हुए, जैसे कि लाइसेंस धारियों को अनुचित लाभ पहुँचाना, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग. ये सब आरोप मनीष सिसोदिया सहित आम आदमी पार्टी के कई नेताओं से जुड़े थे, जिसने इसे और विवादास्पद बना दिया. लगातार बढ़ रहे विवादों के बाद, सरकार ने जुलाई 2022 में इस नीति को वापस ले लिया. पर तब तक मामला सीबीआई और ईडी तक पहुँच चुका था.
जांच एजेंसियों की कार्यवाही और गिरफ़्तारियाँ
सीबीआई और ईडी ने इस मामले में व्यापक जांच की. इस जांच के दौरान कथित तौर पर शराब कारोबारियों से मिली भारी रकम और अनियमितताओं का खुलासा हुआ. इन जांचों के बाद मनीष सिसोदिया समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया और उनके ऊपर कई गंभीर आरोप लगे. केजरीवाल को भी इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था और उनका गिरफ्तारी भी हुई थी, हालांकि उन्हें बाद में जमानत मिल गई. इन सभी घटनाक्रमों ने इस पूरे मामले को बेहद जटिल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया है.
अरविंद केजरीवाल का भविष्य और राजनीतिक प्रभाव
अब, अरविंद केजरीवाल की हाईकोर्ट में याचिका, इस मामले में एक नए अध्याय की शुरुआत है. इस याचिका के नतीजों से न केवल केजरीवाल का भविष्य तय होगा, बल्कि आम आदमी पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है. अगली सुनवाई की तारीख 20 दिसंबर है, जो सभी की निगाहों में है. केजरीवाल को मिलने वाली राहत या उन्हें उठाना पड़ने वाला झटका, आने वाले दिनों की राजनीति को पूरी तरह बदल सकता है. इस मामले की अद्यतन खबरों पर बने रहें।
Take Away Points:
- दिल्ली शराब नीति घोटाले ने दिल्ली की राजनीति को हिलाकर रख दिया है।
- अरविंद केजरीवाल ने ED की जांच पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है।
- हाईकोर्ट ने ED को नोटिस जारी किया है।
- इस घोटाले में मनीष सिसोदिया समेत कई लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है।
- यह मामला आम आदमी पार्टी के भविष्य के लिए बेहद अहम है।

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