बेंगलुरु में “बम धमकी ईमेल” कांड: डार्जिलिंग से गिरफ्तार आरोपी

बेंगलुरु के दो कॉलेजों को भेजे गए बम धमकी ईमेल मामले में बेंगलुरु पुलिस ने एक 48 वर्षीय डार्जिलिंग के रहने वाले दीपांजन मित्रा को गिरफ्तार किया है। घटना 4 अक्टूबर, 2024 की है जब बेंगलुरु इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) के प्रिंसिपल ने वी.वी. पुरम पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें कहा गया था कि उन्हें “svesekr@hotmail.com” नामक ईमेल आईडी से एक धमकी ईमेल मिला था, जिसमें कॉलेज परिसर में हाइड्रोजन आधारित आईईडी रखे जाने की बात कही गई थी। ऐसा ही एक मामला हनुमंतनगर पुलिस स्टेशन में भी दर्ज किया गया था जो कि बीएमएस कॉलेज के प्रिंसिपल ने दर्ज कराई थी।

प्रौद्योगिकी के उपयोग से पुलिस ने आरोपी की लोकेशन का पता लगाया

पुलिस ने तकनीकी रूप से मामले की जांच की और आरोपी का पता लगाया जो डार्जिलिंग के सलबुरी शहर में रहता था। जांच करने पर पता चला कि आरोपी दीपांजन मित्रा बीकॉम ग्रेजुएट है और उसने कथित तौर पर धमकी ईमेल भेजने की बात स्वीकार की। बेंगलुरु पुलिस के अनुसार, मित्रा ने पश्चिम बंगाल में 10 ऐसे ही मामलों में शामिल था।

आरोपी दीपांजन मित्रा की गिरफ्तारी

बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर बी. दयानंद ने बताया, “हम बेंगलुरु के अन्य मामलों में उसकी भूमिका की जांच कर रहे हैं जहाँ स्कूलों और कॉलेजों को धमकी ईमेल मिले थे। अभी तक ऐसा लग रहा है कि उसका कर्नाटक से कोई संबंध नहीं है और इसका मकसद शरारत प्रतीत होता है।” पुलिस ने आरोपी से एक मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है। आरोपी को पश्चिम बंगाल की स्थानीय अदालत में पेश किया गया था और बेंगलुरु पुलिस ने ट्रांजिट वारंट मांगा था। पुलिस ट्रांजिट वारंट प्राप्त नहीं कर सकी और आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया गया। दयानंद ने बताया, “हमने उसे नोटिस भेजकर जांच के लिए पेश होने के लिए कहा है।”

पुलिस की जांच जारी

पुलिस मामले की जांच कर रही है और दीपांजन मित्रा से पूछताछ कर रही है।

आगे की कार्यवाही

बेंगलुरु पुलिस ने दीपांजन मित्रा को ट्रांजिट वारंट जारी करने की मांग की है, तथा अपनी जांच जारी रखे हुए है। पुलिस अन्य मामलों की भी जांच कर रही है, जहां स्कूलों और कॉलेजों को धमकी ईमेल मिले थे, और दीपांजन मित्रा के कर्नाटक के इन मामलों से संबंध की जाँच भी जारी है।

निष्कर्ष

यह घटना बेंगलुरु में स्कूलों और कॉलेजों में सुरक्षा की चिंताओं को उजागर करती है। पुलिस की सक्रियता और जांच से, इस प्रकार की घटनाओं के विरुद्ध मुख्य रूप से तकनीकी आधारित जाँच के माध्यम से, सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था को मजबूत करना ज़रूरी है।

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