बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने एक नए मोड़ पर पहुँचकर उनके सुरक्षाकर्मियों के बयान दोबारा दर्ज किए हैं। घटना के एक हफ़्ते बाद यह कदम उठाया गया है, जिसमें महाराष्ट्र के राजनीतिक नेता बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर को उनके बेटे और विधायक जीशान सिद्दीकी के बांद्रा स्थित कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राज्य सरकार द्वारा बाबा सिद्दीकी को 2+1 सुरक्षा कवर प्रदान किया गया था; दिन में दो सुरक्षाकर्मी और रात में एक। घटना के दिन, जब वे जीशान के कार्यालय पहुँचे, तब उनके साथ दो सुरक्षाकर्मी थे, परन्तु उनमें से एक ने वहीं छोड़ दिया और एक बाबा सिद्दीकी के साथ रहा।
सुरक्षा व्यवस्था में चूक और गवाहों के बयान
सुरक्षा व्यवस्था की कमज़ोरियाँ
बाबा सिद्दीकी की हत्या रात लगभग साढ़े नौ बजे पटाखों और दशहरे जुलूस के बहाने अंजाम दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के समय कार्यालय के आसपास चार लोग मौजूद थे। इनमें से तीन निशानेबाज और एक साज़िशकर्ता था। वे उनकी कार के आसपास इंतज़ार कर रहे थे और जैसे ही बाबा सिद्दीकी गाड़ी में बैठने के लिए बाहर आए, हमलावरों ने एक ऐसा उपकरण इस्तेमाल किया जिससे आसपास धुँआ फैल गया। कई लोगों ने इसे पटाखों का धुँआ समझा, और उपकरण की आवाज़ ने गोलियों की आवाज़ को भी दबा दिया। हत्या के पुनर्निर्माण से पता चला है कि हत्यारों के पास एक प्रकार का पाउडर था, जिसे उन्होंने सिद्दीकी के साथ मौजूद एकमात्र पुलिस कांस्टेबल पर फेंका। कांस्टेबल ने इसे मिर्च पाउडर बताया है। गार्ड ने दावा किया कि उसकी आँखों में कुछ पड़ने के कारण वह उस समय जवाब नहीं दे पाया।
गवाहों के विरोधाभासी बयान
पुलिस जाँच में सुरक्षाकर्मियों के बयानों में कुछ विरोधाभास भी सामने आए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल के सबूतों को एक साथ जोड़कर पुलिस हत्या के सटीक तरीके का पता लगाने में लगी हुई है। इस घटना ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और पुलिस को अपनी जाँच में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के लिए बाध्य किया है।
गिरफ्तारियाँ और फरार आरोपी
मुख्य आरोपियों की गिरफ़्तारी
तीन निशानेबाजों में से दो, हरियाणा के 23 वर्षीय गुरमेल बलजीत सिंह और उत्तर प्रदेश के बहराइच के 19 वर्षीय धर्मराज कश्यप और शिव कुमार गौतम (शिव के नाम से भी जाना जाता है), को गिरफ्तार कर लिया गया है। तीसरा निशानेबाज अभी भी फरार है। पुलिस ने फरार आरोपी की तलाश में जगह-जगह छापे मारे हैं और कई सूत्रों से जानकारी जुटा रही है।
आरोपियों की पहचान और आपराधिक इतिहास
गिरफ़्तार किए गए आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इनका पहले से किसी अपराध में शामिल होने का कोई इतिहास है, और क्या बाबा सिद्दीकी की हत्या के पीछे कोई साज़िश है। पुलिस द्वारा जारी एक लुक आउट नोटिस के जरिए शूभम लोणकर की तलाश भी की जा रही है, जिसके इस हत्याकांड से जुड़े होने की आशंका है। यह आरोपी अत्यधिक खतरनाक और जल्दी से लापरवाह हो सकता है इसलिए उसे पकड़ने के लिए पुलिस पूर्ण सतर्कता बरत रही है।
जाँच की दिशा और भावी कदम
आगे की जांच की रणनीति
पुलिस जांच अब तक हासिल सुराग़ों के आधार पर आगे बढ़ रही है और और अधिक गहनता से घटना के सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष दोनों ही सुबूतों का विश्लेषण करेंगे और अपनी दलीलें पेश करेंगे। मुंबई पुलिस मामले को प्राथमिकता पर लेकर जाँच कर रही है, यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि न्याय निष्पक्ष और प्रभावी हो।
भावी सुरक्षा उपाय और अपराध नियंत्रण
इस घटना ने राज्य में सुरक्षा उपायों में सुधार की ज़रूरत को उजागर किया है, खासकर उन VIPs के लिए जिनकी सुरक्षा के लिए सरकारी सुरक्षा प्रदान की जाती है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस नए कदम उठाएगी, जो इस तरह की हिंसक गतिविधियों को रोकने में बेहतर हों। यह सुनिश्चित करना भी अहम होगा की सरकारी सुरक्षा को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, जिससे किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक नहीं हो और किसी को भी भविष्य में इस तरह के खतरों का सामना ना करना पड़े।
Takeaway Points:
- बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच अभी भी जारी है और कई अहम पहलू सामने आना बाकी हैं।
- पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है लेकिन एक अभी भी फरार है।
- इस घटना ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
- भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।
- जांच में सुरक्षाकर्मियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य होंगे।

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