अयोध्या में पहली बार राम मंदिर में दिवाली का उत्सव: रामलला का भव्य श्रृंगार
इस साल की दिवाली अयोध्या के लिए बेहद खास है! 500 साल के इंतजार के बाद, भव्य राम मंदिर में पहली बार दिवाली का त्योहार मनाया जा रहा है. रामलला के भव्य श्रृंगार की खबर ने हर किसी को रोमांचित कर दिया है. सोने और चांदी के तारों से सजे पीले रेशमी वस्त्रों में रामलला के दर्शन का नजारा देखते ही बनता है! इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए लोग अयोध्या की ओर बढ़ रहे हैं। आइए जानते हैं इस खास दिवाली के बारे में सब कुछ!
रामलला का पीतांबर धारण
रामलला (बालक राम) इस बार पीले रंग के सिल्क के वस्त्र धारण करेंगे. पीले रंग की रेशमी धोती और वस्त्रों पर सोने और चांदी के तारों से वैष्णव प्रतीक सजाए गए हैं. कई प्रकार की माला और आभूषणों से उनका श्रृंगार किया जाएगा. यह पीला रंग शुभता का प्रतीक है, और रेशमी वस्त्र भी शुभ माने जाते हैं. गुरुवार के दिन पड़ने वाली इस दिवाली को और भी खास बनाती है।
राम मंदिर का भव्य दीपोत्सव
अयोध्या में, राम मंदिर के उद्घाटन के बाद पहला दीपोत्सव मनाया जा रहा है. यूपी सरकार ने सरयू नदी के तट पर 28 लाख दीये जलाकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है. यह नजारा वाकई में अद्भुत और यादगार होगा! इस भव्य दीपोत्सव से अयोध्या पूरी तरह जगमगा रहा है।
भव्य राम मंदिर: विश्व की आस्था का केंद्र
राम मंदिर का निर्माण अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना है। इस भव्य मंदिर के निर्माण से हिन्दुओं में अपार खुशी और आस्था का संचार हुआ है. दिवाली जैसे पावन अवसर पर इस मंदिर में रामलला के दर्शन का सौभाग्य पाकर भक्तों का मन प्रफुल्लित है।
दिवाली का महत्व: रामराज्य की शुरुआत की याद
दिवाली का त्योहार भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने और रामराज्य की स्थापना की याद में मनाया जाता है. यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस पावन त्योहार पर रामलला के दर्शन और भव्य दीपोत्सव का आनंद लेना जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।
टेक अवे पॉइंट्स
- अयोध्या में राम मंदिर में पहली बार दिवाली का उत्सव मनाया गया।
- रामलला का भव्य पीतांबर धारण किया गया।
- सरयू नदी के किनारे 28 लाख दीये जलाए गए।
- यह दिवाली अयोध्या के लिए एक ऐतिहासिक दिवाली है।

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