नई दिल्ली : युवा पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की मुश्किलों में लगातार इजाफ़ा हो रहा है. आए दिन हार्दिक रैलियों और भाषणों के दौरान कई प्रकार के बुरे बर्ताव से गुजरते रहते है. अब उन पर विसनगर कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें 2 साल जेल की सजा सुनाई है. यहां उनके साथ ही उनके चाहने वालों के लिए भी एक बहुत बड़ा झटका है. हार्दिक पटेल के अलावा कोर्ट ने 3 अन्य लोगों को भी इस ममले में सजा सुनाई है.
अदालत के फैसले के तुरंत बाद हार्दिक ने ट्वीट किया कि सामाजिक न्याय और सामाजिक अधिकार के लिए लडऩा अगर गुनाह हैं तो हां मैं गुनहगार हूं। सत्य और अधिकार की लड़ाई लडऩे वाला अगर बागी है तो हां मैं बागी हूं। सलाखों के पीछे सत्य, किसान, युवा और गरीबों के लिए लडऩे वाली मेरी आवाज को भाजपा की हिटलरशाही सत्ता नहीं दबा सकती।
पाटीदार नेता ने कहा कि वह अदालत द्वारा सजा सुनाये जाने से भयभीत नहीं हैं क्योंकि वह पहले ही सर पर कफन बांध चुके हैं। सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में पाटीदार समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन की अगुवाई कर रहे 25 वर्षीय हार्दिक पर राजद्रोह सहित कई आरोपों में मामले दर्ज हैं। उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि मेरी फितरत में है जालिमों से मुकाबला करना और हक के लिए लडऩा। जितना दबाओगे उतना ही चुनौती बन के उभरूंगा।
प्राप्त मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, हार्दिक को 3 साल पुराने मेहसाणा दंगा मामले में सजा सुनाई गई है. उन पर बीजेपी विधायक ऋषिकेश पटेल के कार्यालय में तोड़फोड़ करने के आरोप लगे थे. इसमें और भी कई अन्य लोग शामिल थे. जिसमे हार्दिक के साथ 3 और लोगों को दोषी पाया गया है. जबकि इस ममले में 14 लोगों को कोर्ट ने बरी कर दिया है.
गौरतलब है कि साल 2015 में हार्दिक पटेल द्वारा पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग की गई थी. जहां आरक्षण की मांग मेहसाणा के विषनगर में दंगों में बदल गयी थी. हार्दिक पर आरोप लगे थे कि उन्होंने इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के विधायक ऋषिकेश पटेल के कार्यालय में तोड़फोड़ की थी. जिस पर अब कोर्ट ने फैसला सुनते हुए उन्हें 2 साल जेल की सजा सुनाई है.
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