चंडीगढ़। भले ही हरियाणा में कांग्रेस ने 33 साल राज किया हो, लेकिन रादौर एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है, जहां कांग्रेस का उम्मीदवार कभी जीत दर्ज नहीं कर पाया है। रादौर 1977 में एक नए विधानसभा क्षेत्र के तौर पर सामने आया था. इसके बाद पिछले 37 साल में यहां नौ बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, कांग्रेस को हर बार हार का ही मुंह देखना पड़ा है।
इस क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार तो हारता ही है, लेकिन जीत दर्ज करने वाला विधायक भी मंत्रिमंडल में अपनी जगह बनाने के लिए तरसता ही रहा है। इस दौरान पांच बार 1977, 1987, 1996, 2000 और 2014 में गैर कांग्रेसी सरकारें बनीं, लेकिन रादौर का कोई विधायक कभी मंत्री नहीं बन पाया।
रादौर विधानसभा क्षेत्र के अस्तित्व में आने के बाद 1977 में पहली बार यहां से जनता पार्टी के लहरी सिंह विधायक बने। 1982 के विधानसभा चुनाव में रादौर से निर्दलीय उम्मीदवार मास्टर राम सिंह चुने गए। 1987 के चुनावों में लोगों ने यहां से भाजपा के रतनलाल कटारिया को विधानसभा में भेज दिया। 1991 में हुए चुनावों में रादौर से हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर लागरी सिंह ने जीत दर्ज की। 2000 के चुनावों में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के बंताराम वाल्मीकि बाजी जीतने में कामयाब रहे।
कांग्रेस के रादौर से हारने का सिलसिला 2005 के चुनावों में भी जारी रहा और लोगों ने जीत का सेहरा इनेलो के ईश्वर पलाका के सिर पर बांध दिया। वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद रादौर सीट रिजर्व से सामान्य सीट हो गई। इसके बाद 2009 में विधानसभा चुनाव हुए और कांग्रेस को मात देते हुए इनेलो के डॉ. बिशनलाल सैनी विधायक चुन लिए गए। 2014 के चुनावों में रादौर सीट पर भाजपा के श्याम सिंह राणा चुनाव जीत कर विधानसभा में पहुंच गए।
हरियाणा में एक बार फिर विधानसभा चुनाव होने हैं। रादौर सहित राज्य के सभी 90 क्षेत्रों के लिए 21 अक्टूबर को मतदान होना है। मुकाबला यहां एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होना है। अब यह तो 24 अक्टूबर को चुनाव परिणाम आने पर ही साफ हो पाएगा कि रादौर क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के कभी नहीं जीत पाने का सिलसिला इस बार भी टूट पाता है या नहीं।
Leave a Reply