हरियाणा की छोरियां छोरों से कहीं कम नहीं है, दो बहने चला रही प्रशिक्षण के बाद भारी वाहन

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चंडीगढ़। हरियाणा की छोरियां छोरों से कम नहीं हैं। ‘दंगल’ फिल्म के इस डायलॉग ‘म्हारी छोरियां छोरों से कम सैं के’ को इस बार सही साबित कर दिखाया है रोहतक में एकता कॉलोनी की दो सगी बहनों मीना हुड्डा और रीना हुड्डा ने। यह दोनों सगी बहनें इन दिनों हैवी लाइसेंस लेकर बसें चला रही हैं।

झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए रोजाना बस में लाना और छोड़ना इनके जिम्मे है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त यूनिवर्सिटी (इग्नू) से मास्टर ऑफ़ सोशल वर्क कर रही यह दोनों बहनें बस चलाने के साथ ही बच्चों को पढ़ाती भी हैं। बचपन में इनके सिर से पिता का साया उठ गया था। आर्थिक तंगी का सामना करते हुए मीना हुड्डा ने हरियाणा रोडवेज के रोहतक स्थित प्रशिक्षण केंद्र से भारी वाहन चलाने का लाइसेंस हासिल किया। ऐसा करने वाली रोहतक की वह पहली युवती थी। इसके बाद मीना की बहन रीना ने भी झज्जर जिले के बहादुरगढ़ प्रशिक्षण केंद्र से भारी वाहन चलाने का लाइसेंस ले लिया। बस चलाने का प्रशिक्षण लेने वाले 100 लड़कों के बैच में रीना अकेली लड़की थी। लड़के अक्सर उसकी मजाक उड़ाया करते थे। हालांकि, प्रशिक्षण के बाद होने वाले जरूरी ट्रायल में दोनों बहनों पहली बार में ही पास हो गई थी।

मीना और रीना का कहना है कि उनकी मां इंद्रवती और भाइयों ने उनका हौसला बढ़ाया। परिवार का समर्थन मिलने पर उनकी झिझक खत्म हो गई और वे दोनों बस में ड्राईवर की उस सीट पर जा बैठी, जहां अक्सर पुरुष ही बैठे नजर आते हैं। इंद्रवती का कहना है कि उन्हें अपनी बेटियों पर गर्व है। इन दिनों यह दोनों बहनें मेक द फ्यूचर ऑफ़ कंट्री (एमटीएफसी) संस्था से जुड़ी हैं।

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