स्पेशल गिरदावरी की कुमारी सैलजा ने की मांग

चंडीगढ़ । हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि के कारण बर्बाद हुई फसलों की स्पेशल गिरदावरी करवाकर प्रभावित किसानों को 20 दिनों के अंदर मुआवजे का भुगतान करने की मांग की है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में शनिवार को हुई बारिश व ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, सब्जियों तथा अन्य फसलों को 80 प्रतिशत से अधिक तक का नुकसान हुआ है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि जब से केंद्र और प्रदेश में भाजपा सरकार आई है तभी से हमारे मेहनतकश किसानों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिछले 5 वर्ष के ज्यादा के समय से किसान लगातार इस सरकार की मार झेल रहे हैं। यह सरकार बार-बार किसानों को प्रताड़ित करने का काम कर रही है। कभी कृषि उत्पादों पर जीएसटी लगाया जाता है। कभी उनकी फसल की खरीद ही नहीं की जाती है। कभी किसानो की फसलों को औने पौने दामों पर खरीदा जाता है। किसान इस सरकार में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। अभी हाल ही में प्रदेश में बड़े स्तर पर धान घोटाला हुआ और इस पर पर्दा डालने के लिए घोटाले की जांच की मांग कर रहे किसानों पर लाठियां बरसाई गई।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान पहले ही इस सरकार की जनविरोधी नीतियों की मार झेल रहा है। ऐसे समय में कुदरत की यह मार किसानों के लिए बिल्कुल ही असहनीय है, जिसे दूर करने के लिए सरकार द्वारा तत्काल प्रभाव से प्रभावी कदम उठाए जाने की बेहद ही आवश्यकता है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार फसलों की गिरदावरी करवाकर सभी प्रभावित किसानों को 20 दिनों के अंदर मुआवजा प्रदान करे, ना कि फसल बीमा योजना में बीमा कंपनियों पर छोड़ा जाए। क्योंकि कई किसानों ने इस फसल बीमा योजना को अपनाया ही नहीं है, तो कई किसानों को पिछले वर्षों का मुआवजा ही इन बीमा कंपनियों द्वारा अभी तक नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा कि अब फसल बीमा योजना में केंद्र सरकार बीमा प्रीमियम राशि की 50 प्रतिशत की बजाए केवल 25 प्रतिशत राशि का भुगतान ही करेगी। जो दिखाता है कि सरकार किस तरह से किसान विरोधी फैसले ले रही है।

उन्होंंने कहा कि आंकड़े दर्शाते हैं कि तीन साल में बीमा कंपनियों ने फसल बीमा योजना से 77,801 करोड़ रुपये प्रीमियम लिया तथा 19,202 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। यह योजना किसानों से लूट खसोट कर निजी कंपनियों के मुनाफे का सौदा बनकर रह गई है। इसीलिए किसानों को बीमा कंपनियों के भरोसे पर ना छोड़कर तुरंत राहत प्रदान की जाए।

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