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सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों के समान कार्य के बदले समान वेतन देने के मामले सुनवाई करते हुए अहम आदेश दिया है। मामलें कि सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश दिया है कि पहले आप शिक्षकों का वेतन 40 फीसदी बढ़ाए तब हम विचार करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के वेतन बढ़ाने की पीछे दलील दी है कि जब एक चपरासी का वेतन 36 हजार रुपए प्रति माह है, तो ऐसे में छात्रों का भविष्य बनाने वाले शिक्षकों किसी चपरासी से कम यानि 26 हजार रुपए वेतन कैसे मिल सकता है।
सरकार को याद रखना चाहिए कि समाज में शिक्षक का विशेष स्थान होता है और सभी को इस बात को ध्यान में रखना चाहिए। वहीं इस मसलें पर केंद्र सरकार की तरफ से अटॅार्नी जनरल के.के वेणुगोपाल ने दलील देते हुए कहा कि अगर कि सरकार बिहार के शिक्षकों का वेतन बढ़ती है तो ऐसी स्थति में देश के अन्य राज्यों के शिक्षक भी अपना वेतन बढ़ाने की मांग करेंगे जिसे पूरा कर पाना सरकरा के लिए स्वाभाविक नहीं होगा।
आपको बता दे कि शिक्षकों के वेतन का 70 फीसदी पैसा केंद्र सरकार और 30 फीसदी पैसा राज्य सरकार देती है। ओर अगर बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश मानती है तो ऐसे में शिक्षको की मौजुदा वेतन 20-25 हजार रुपए से बढ़कर 35-40 हजार रुपए हो जाएगा।
अटॅार्नी जनरल ने उच्चतम न्यायलय से अपील की है कि केंद्र सरकार को शिक्षकों के वेतन को लेकर नई योजना के लिए चार सप्ताह का समय दिया जाए। जिसे मानते हुए उच्चतम न्यायलय ने केंद्र सरकार की समय सीमा बढ़ाने की मांग को मानते हुए मामले की सुनवाई के लिए 12 जुलाई का समय दिया है।
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