जयपुर। प्रदेश के मुख्य सचिव डी. बी गुप्ता ने वन डिस्ट्रीक्ट-वन प्रोडक्ट निर्यात लक्ष्य की रणनीति बनाते हुए प्रदेश से निर्यात को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर निर्यात संभावनाओं को तलाशते हुए प्रदेश से निर्यात को प्रोत्साहित किया जाएगा।
मुख्य सचिव सचिवालय में राजस्थान निर्यात संवद्र्धन समन्वय परिषद की पहली बैठक को संबोधित कर रहे थे। प्रदेश से वस्तुओं के निर्यात के साथ ही सेवाओं के निर्यात की ठोस रणनीति तैयार की जाएगी और इसके लिए चैंपियन सर्विस सेक्टर चिन्हित किए जाएंगे।
मुख्य सचिव गुप्ता ने कहा कि प्रदेश से निर्यात की विपुल संभावनाओं का दोहन किया जाना है और इसके लिए संबंधित विभागों को परस्पर सहयोग व समन्वय के साथ काम करना होगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान निर्यात संवद्र्धन समन्वय परिषद का मुख्य कार्य प्रदेश से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक व्यवस्था, मार्गदर्शन और सहयोग से समन्वित प्रयासों के साथ ही निर्यात में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। उन्होंने बताया कि यह समन्वय परिषद औद्योगिक संगठनों, केन्द्र व राज्य सरकार के संबंधित विभागों व उपक्रमों से समन्वय स्थापित करने के साथ ही प्रदेश में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का सृजन करेगी।
उद्योग आयुक्त मुक्तानन्द अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश से 2018-19 में 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ है। उन्होंने बताया कि निर्यात क्षेत्र में इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, कृषि, जेम एवं ज्वैलरी, खनिज एवं मिनरल सहित विभिन्न क्षेत्रों से निर्यात हो रहा है। उन्होेंने कहा कि राजस्थान निर्यात संवद्र्धन समन्वय परिषद के गठन से निर्यात मे और अधिक बढ़ोतरी होगी वही निर्यात को नई दिशा मिल सकेगी।
अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान निर्यात संवद्र्धन परिषद के गठन की भी औपचारिकता अंतिम चरण में है और एक दो दिन में ही इसका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन राजीव स्वरुप, प्रमुख सचिव टूरिज्म श्रेया गुहा, सीसीटी श्रर प्रीतम यशवंत, एमडी रीको आशुतोष पेडनेकर, सचिव पशुपालन डॉ राजेश शर्मा, सचिव पार्यावरण व वन डॉ. डीएन पाण्डे समेत अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
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