केवटी, बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में केवटी विधानसभा क्षेत्र पर सबकी नजरें हैं। यहां से राजद के मुस्लिम चेहरे अब्दुल बारी सिद्दीकी चुनाव लड़ रहे हैं। वे सात बार विधायक रह चुके हैं। आठवीं बार विधायक बनने के लिए जी-जान से लगे हैं। लेकिन इस बार चुनौती कुछ ज्यादा है। क्योंकि केवटी से पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले अलीनगर से चुनाव लड़ते थे। नया क्षेत्र होने के कारण नई तरह की चुनाैती है। बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में 7 नवंबर को केवटी में मतदान हुआ।
माय समीकरण पर भरोसा
बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में 7 नवंबर को मतदान हो चुका है। अंतिम चरण में सीमांचल में भी मतदान हुआ। इस मुस्लिम बहुल इलाके में सिद्दीकी राजद के ट्रंप कार्ड माने जाते हैं। इस बार एआइएमआइएम ने भी मुस्लिम बहुल सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए हैं। अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पूरी ताकत झोंक दी है। ओवैसी के कारण मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में राजद महागठबंधन को चुनाैती का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं
2015 में राजद महागठबंधन ने जीता था चुनाव
केवटी विधानसभा क्षेत्र में 15 प्रत्याशी मैदान हैं। इनके भाग्य का फैसला 2, 89, 381 मतदाता करेंगे। राजद प्रत्याशी सिद्दीका का मुकाबला भाजपा प्रत्याशी डॉ. मुरारी मोहन झा से है। 2015 के चुनाव में राजद के फराज फातमी ने भाजपा के अशोक कुमार यादव को 7, 830 मतों से पराजित किया था। पिछली बार राजद और जदयू के बीच गठबंधन था। इस बार भाजपा-जदयू गठबंधन हो गया है। ऐसे में राजद के सामने चुनाैती बढ़ गई है। दरंभगा जिले की केवटी विधानसभा सीट मधुबनी लोकसभा क्षेत्र के तहत है। यहां से पिछली बार भाजपा के अशोक कुमार यादव चुनाव लड़े थे। अबकी यादव के स्थान पर भाजपा ने डॉ. मुरारी मोहन झा को चुनाव मैदान में उतारा है।
बातों के मद्देनजर सिद्दीकी अपनी परंपरागत सीट अलीनगर के बजाय केवटी से चुनाव लड़ रहे हैं। सिद्दीकी को राजद के मुस्लिम और यादव समीकरण पर पूरा भरोसा है।
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