यहां “मौत” का “सिलसिला” है,जारी

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संवाददाता-विवेक चौबे

पलामू : प्रायः ऐसा समझा जाता है कि जल ही जीवन है,किंतु इस खबर के जरिए आप जानेंगे कि जल जीवन नहीं बल्कि मौत का कारण बनता जा रहा है। हम बात कर रहे हैं, चुकरू गांव की,जहां लगातार जारी है मौत का सिलसिला। यहां एक-एक कर मौत के मुंह में समाते जा रहे हैं,लोग। ग्रामीण कहते हैं कि कोई चलने से लाचार है,तो किसी के बैठने के बाद बिना किसी सहारे के खड़ा होना मुश्किल है। कोई चारपाई पर पड़े हुए ही अपने जीवन की शेष अवधि को गुजार रहा है।

बता दें कि विगत 25 वर्षों से यहां के लोग फ्लोराइड युक्त जल पीने को विवश हैं। लोगों को स्वच्छ जल मुहैया कराने के लिए वर्षों पहले नल के माध्यम से पानी स्वच्छ कराने की व्यवस्था की गई थी। वहीं ग्रामीण जलापूर्ति योजना की भी शुरुआत की गई थी,किन्तु अब सबके सब बेकार पड़े हैं। फ्लोराइड युक्त जल का असर सर्वप्रथम दातों पर पड़ता है।

फिर धीरे-धीरे शरीर को जकड़ना प्रारम्भ कर देता है। अंत में यह पूरे शरीर को विकलांग बना कर ही दम लेता है। इसी का उदाहरण इसी गांव के पीड़ित सुदामा पाल भी है। ऐसे चुकरूं गांव में अनगिनत अन्य लोग भी हैं, जिनकी हालात बद से बदतर होती जा रही है। तथाकथित जीवन ज्योत टीम के सदस्य द्वारा सुदामा पाल के घर पहुंचकर आर्थिक मदद प्रदान की गई थी। उक्त गांव की हालात से रूबरू भी हुए थे।

इन सभी परिस्थितियों का मुख्य जड़ केवल यहां फ्लोराइड युक्त जल दिखा। जलापूर्ति योजना का शुरुआत गांव में किया तो गया था,किन्तु जिस नदी से ग्रामीणों को पानी मुहैया कराया जाता था,वह अभी ठप पड़ा हुआ है, क्योंकि नदी में निर्मित कुआं जो बालू से भर गया है। वहीं गांव की टंकी भी खराब पड़ी है।

ग्रामीणों ने बताया कि अगर पानी जलापूर्ति योजना के तहत फिर से हम सब को मिलना शुरू हो जाता है तो वह गांव से बेहतर पानी है,उससे स्वास्थ्य तो कमसे कम ठीक रहेगा। कोई जनप्रतिनिधि या आला अधिकारी ग्रामीणों की सुनता ही नहीं। उक्त सभी समस्याओं से रूबरू होते हुए जीवन ज्योत टीम के संस्थापक- दुर्गेश सिंह द्वारा लोगों को आश्वस्त किया गया कि हम आप सब की मदद अवश्य करेंगे।

वहीं दुर्गेश सिंह ने क्षेत्र के कर्मठ,जुझारू,समाजसेवी व आला अधिकारी से अनुरोध करते हुए शीघ्र ही इस समस्या से निजात दिलाने की अपील की है।

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