भाजपा-कांग्रेस राजनीतिक जोडतोड़ में छोटे-छोटे ग्रुपों के सामने टेक रहे हैं घुटने

इस समय गुजरात चुनाव में पार्टियां राजनीतिक जोड़तोड़ करती नजर आ रही है… दोनों बड़े दल- कांग्रेस और भाजपा, हार्दिक पटेल जैसे उभरे नए पॉवर पाइंट को लेकर परेशान हैं और कोशिश कर रहे हैं प्रत्यक्ष या परोक्ष, जैसे भी हो इनका समर्थन उन्हें मिले! इधर, हार्दिक पटेल का पूरा आंदोलन गुजरात की भाजपा सरकार के खिलाफ रहा है इसलिए जहां कांग्रेस पूरी ताकत लगा रही है कि हार्दिक उनके साथ आए, जिसके लिए हार्दिक तैयार भी है तो उधर, भाजपा, हार्दिक के सहयोगियों को भाजपा खेमे में लाने के प्रयास कर रही है, यदि ऐसा होता है तो… आंदोलन से तैयार एक बड़ा वोट बैंक बिखर जाएगा! वैसे भी हार्दिक जैसे नेताओं का महत्व सरकार बनने तक ही है… चुनाव के बाद चाहे किसी की भी सरकार आए, उन्हें उतना महत्व नहीं मिलना है!भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच इस रस्साकशी के दौरान इन नए चेहरों का आना-जाना जारी है. ताजा, पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल के कांग्रेस के साथ जाने की खबर के बीच उनके दो करीबी रहे… रेशमा पटेल और वरुण पटेल भाजपा में शामिल हो गए!
रेशमा और वरुण ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भेंट की और इसके बाद उन्होंने भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया! इसके बाद एक-दूजे पर आरोपों का दौर भी शुरू हो गया जो चुनाव होने तक जारी रहेगा! जहां वरुण ने भाजपा में आने के बाद हार्दिक पटेल को गद्दार बताया वहीं हार्दिक पटेल ने ट्वीट कर कहा… कनखजूराह के पैर टूट जाने के बावजूद भी कनखजुराह दौड़ेगा! मेरे साथ जनता हैं… जनता का साथ है तब तक लड़ता रहूँगा!

बहरहाल, गुजरात में कॉलेज इलैक्शन जैसे माहौल में यह कहना मुश्किल है कि इन पॉवर पाइंट का राजनीतिक ऊंट किस करवट बैठेगा? और इसका चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ेगा? क्योंकि कॉलेज इलैक्शन में अक्सर एक ग्रुप सवेरे किसी नेता के साथ होता है तो शाम को किसी दूसरे नेता के, और… वोट किसी तीसरे को देता है! लेकिन… इस वक्त दोनों बड़े दलों को छोटे-छोटे ग्रुपों के सामने घुटनों के बल देख कर जनता को इलैक्शन का बड़ा मजा आ रहा है!

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