बिहार में उपचुनावों में कांग्रेस की हार और पार्टी नेताओं के बीच लड़ाई के बीच आज विशेष बैठक

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नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव और उपचुनावों में हार का सामना करने के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस की विशेष समिति की एक बैठक आज होने जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आज शाम 5 बजे बैठक होगी, लेकिन इसका एजेंडा स्पष्ट नहीं है।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब चुनावों में हार के बाद कांग्रेस में समीक्षा का मुद्दा उभर रहा है। पार्टी में सुधार की मांग करने के लिए कुछ महीने पहले सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 23 कांग्रेसी नेताओं में से एक कपिल सिब्बल ने हार की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की है, जिसके बाद वह साथी कांग्रेसी नेताओं के निशाने पर आ गए हैं।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी तक कांग्रेस नेता सिब्बल पर सवाल उठा रहे हैं। इस सब के बीच सोनिया गांधी की सलाहकार समिति की बैठक कई अटकलों को जन्म दे रही है। अगस्त में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष, सोनिया गांधी को संगठनात्मक और संचालन मामलों पर सहायता के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया था।

अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल, एके एंटनी, अंबिका सोनी, मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला इसके सदस्य हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि बीमार स्वास्थ्य के कारण अहमद पटेल अस्पताल में भर्ती हैं। इसके बावजूद, इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस के अंदर एक नया तूफान आ रहा है।

बिहार में हार का ठीकरा कांग्रेस के सिर फूटा

हाल ही में संपन्न बिहार चुनावों में महागठबंधन (महागठबंधन) की हार के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया जा रहा है। महागठबंधन में राजद और वामपंथी दलों की सफलता की दर 50 फीसदी से अधिक थी, जबकि कांग्रेस 70 सीटों में से केवल 19 सीटें ही जीत सकी थी। मध्य प्रदेश उपचुनाव में कांग्रेस को 28 में से केवल नौ सीटें मिलीं। कर्नाटक की दो विधानसभा सीटों और गुजरात की आठ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। कांग्रेस का प्रदर्शन यूपी में भी निराशाजनक रहा जहां प्रियंका गांधी प्रभारी हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजद नेताओं ने कांग्रेस पार्टी के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। राजद नेता शिवानंद तिवारी ने पार्टी नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने प्रचार अभियान में ध्यान नहीं दिया क्योंकि प्रियंका गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ। मनमोहन सिंह और कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी जैसे कई वरिष्ठ नेताओं ने मतदान तक नहीं किया।

 

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