पंजाब में 5.44 लाख मरीज़ रजिस्टर हुये नशा मुक्ति प्रोग्रााम के तहत

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चंडीगढ । नशा मुक्ति प्रोग्राम के सैंट्रल ऑनलाइन पोर्टल सिस्टम पर 5.44 लाख से अधिक मरीज़ रजिस्टर्ड हुए हैं। लॉकडाऊन /कफ्र्यू की मियाद के दौरान नशा छोडऩे के लिए इलाज के लिए आगे आने वाले मरीज़ों की संख्या में काफ़ी विस्तार हुआ है। 23 मार्च, 2020 से राज्य भर में तकरीबन 1.29 लाख नये मरीज़ इलाज के लिए आगे आए हैं।
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुये स्वास्थ्य मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि नोवल कोरोना वायरस (कोविड -19) के चुनौती भरे समय के दौरान नशा पीडि़तों के लिए बड़ी राहत के तौर पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर के नेतृत्व वाली सरकार ओट क्लीनिकों और नशा मुक्ति केन्द्रों के द्वारा मरीज़ों को नशा छोडऩे सम्बन्धी इलाज सेवाओं प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि तालाबन्दी और कफ्र्यू के समय के दौरान सरकार ने विशेष पहलकदमियां की हैं जिसके अंतर्गत इलाज और देखभाल सेवाएं मुहैया करवाने हेतु मरीज़ों को एक सप्ताह से तीन सप्ताह तक की दवा दी गई थी जिससे लॉकडाउन के कारण मरीज़ को इलाज सम्बन्धी कोई मुश्किल पेश न आए।
परन्तु लॉकडाऊन में दी गई ढील के बाद मरीज़ों को काउंसलिंग समेत अधिक से अधिक 7 दिनों की दवा दी जा रही है जिससे उनमें आत्म-विश्वास पैदा किया जा सके और उनकी नशों की आदत छूट जाये। यह कदम इसलिए उठाए गए हैं जिससे मरीज़ों को बार-बार केन्द्रों पर न जाना पड़े और कोविड -19 के फैलाव को रोका जा सके।
स. सिद्धू ने बताया कि इन केन्द्रों में मरीज़ों को कोरोना वायरस और इसके रोकथाम उपायों संबंधी अच्छी तरह जागरूक किया जाता है। सामाजिक दूरी बना कर रखी जाती है और मरीज़ों को बताया जाता है कि तेज़ बुख़ार, सुखी खाँसी और साँस लेने में मुश्किल होने की स्थिति में वह लाजि़मी तौर पर स्वास्थ्य संस्थाओं को सूचित करें। ऐसे मरीज़ों की सम्बन्धित नशा मुक्ति केन्द्रों और ओओएटी क्लिनिकों में आने की सुविधा के लिए जि़ला अधिकारियों के साथ संपर्क बना कर रखा जा रहा है।
आईसोलेशन वार्ड के बीच वाले मरीज़ों और एकांतवास किये व्यक्तियों की काउंसलिंग की जा रही है।

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